प्रो. सिंह ने बताया कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली और बुंदेलखंड विवि झांसी के संयुक्त तत्वावधान में यह सेमिनार हुआ। इसमें डॉ. कैलाश विश्वकर्मा, डॉ. श्रीराम, डॉ. राकेश भाटिया, डॉ. इंद्राणी, डॉ. आशीष अरोड़ा, डॉ. संजय देशपांडेय, डॉ. अनुराधा गुप्ता, डाॅ. कोमल असरानी, शैफाली, दीपक वशिष्ठ, अनिल ठाकुर, डॉ. सोनिया गुप्ता के अलावा कई राज्यों के आदिवासी गणित विद्वान शामिल हुए। इस दौरान विद्वानों ने कहा वैदिक गणित के साथ जैन, बौद्ध और आदिवासियों की गणना पद्धति को शामिल कर भारतीय गणित विषय बनाना चाहिए।
अब कोई भी भारतीय गणित में परास्नातक कर सकेगा
प्रो. शिवराज सिंह ने बताया कि अब ऐसा नहीं होगा कि गणित से इंटर अथवा स्नातक करने वाला ही वैदिक गणित में परास्नातक करेगा। तय हुआ है कि किसी भी स्ट्रीम का विद्यार्थी वैदिक गणित में परास्नातक कर सकेगा। दूसरी स्ट्रीम से आने वाले विद्यार्थी के लिए सामान्य पाठ्यक्रम होगा और गणित से आने वाले विद्यार्थी के लिए एडवांस पाठ्यक्रम होगा।