संस्था की आय पर विधायकों का दखल क्यों?
अर्चना वर्मा की तरफ से लगाए आरोपों में हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक व सिवालखास विधायक जितेंद्र सतवई पर आरोपियों को संरक्षण देने की बात कही है। मवाना पुलिस पर भी इनके दबाव में काम करने का आरोप है। सवाल ये है कि आखिर शिक्षण संस्था की आय पर विधायकों का दखल क्यों है। आखिर क्यों इस तरह से दंबगई करने वालों को आशीर्वाद दिया जा रहा है।
अधिकारियों से शिकायत करें
विधायक दिनेश खटीक का कहना है कि यदि फैसला नहीं माना है तो अधिकारियों से शिकायत करें। निष्पक्ष कार्रवाई होगी। यदि कोई कहता है कि उनको सपोर्ट कर रहे हैं, यह आरोप गलत हैं हमारे पास आएं। बताए कौन अधिकारी ऐसा कह रहा है। हम उससे बात करेंगे। वे फैसला न मानने वालों के साथ नहीं हैं। एसडीएम को प्रार्थना पत्र दें। एसडीएम प्रशासनिक अधिकारी हैं। वह निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे। इस मामले से अब मेरा कोई लेना देना नहीं है। मैं तटस्थ हूं।
फैसले से पीछे नहीं
कृषक पीजी कॉलेज के प्रबंधक अजय कुमार का कहना है कि वे फैसले से पीछे नहीं हटे हैं। जो सात एकड़ भूमि है उसकी मालिक फैसले में हुए निर्णय के अनुसार पांच सदस्यीय कमेटी है। जो भी करेगी वहीं कमेटी करेगी। कोई चारा न तो बोया गया और न ही काटा गया। एक खेत में पहले से बोया हुआ था। उसका हिसाब किताब भी कमेटी के पास ही है। उन्होंने तो इस भूमि से अपने आपको उस दिन हुए फैसले के बाद से ही अलग कर लिया था। क्योंकि कानून का जो भी निर्णय होगा उनको स्वीकार होगा। कॉलेज इस जमीन के पैसे से कब चल रहा था। ऑडिट में कब उन्होंने इस जमीन का पैसा दिखाया है। यह जमीन उनके नाम है ही नहीं।
उधर, विधायक जितेंद्र सतवाई से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके किसी व्यक्ति ने उनको मीटिंग में होने और बाद में बात कराने की बात कही है। लेकिन बाद में विधायक का फोन बंद हो गया।
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