गांव-गांव जाकर एकत्र किए थे दस्तावेज
आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा की जांच में पांच करोड़ 92 लाख, 62 हजार 700 रुपये का घोटाला सामने आया था। जांच में खुलासा हुआ है कि बिजनौर जिले में गांव-गांव जाकर 1015 छात्रों से उनके शैक्षिक दस्तावेज एकत्र किए और देहरादून, ऊधमसिंह नगर और काशीपुर के सात कॉलेजों में अध्ययनरत दर्शाकर बैंकों में खाते खुलवाए गए थे।
आरोपियों ने जिला समाज कल्याण अधिकारी और अन्य प्रधान लिपिक व कर्मचारियों की मिलीभगत से इसे अंजाम दिया। देहरादून के मोहल्ला करनपुर में इंडियन इंसटीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस का बोर्ड लगाकर 37 छात्रों के प्रवेश भी दिखा दिए गए। इसके बाद शासन से सत्र 2010-11 के लिए आई छात्रवृत्ति हड़प ली गई। प्रदेश सरकार ने उसी समय दूसरे राज्यों में पढ़ रहे यूपी के छात्रों को छात्रवृत्ति देने की योजना शुरू की थी। इतना ही नहीं, उत्तराखंड में फर्जी तरीके से कूट रचित कागज तैयार कराकर बैंकों में खाते खुलवाए गए थे।
आरोपियों ने जिला समाज कल्याण अधिकारी और अन्य प्रधान लिपिक व कर्मचारियों की मिलीभगत से इसे अंजाम दिया। बिजनौर पुलिस ने अंकित और भीम सिंह को पिस्टल, कूट रचित कागज और अन्य कागजों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी ने भी 15 अक्तूबर, 2014 को केस दर्ज कराया था। पहले जांच बिजनौर पुलिस ने की, बाद में आठ अप्रैल, 2015 को शासन ने इस जांच ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर को सौंप दी थी।
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