खूब भा रहा गंगा का बेसिन
डॉल्फिन के साथ ही गंगा के इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में कछुए, घड़ियाल और सारस का झुंड भी दिखाई दिया है। तरह-तरह के जलीय जीवों की संख्या बढ़ने से डॉल्फिन के लिए ये क्षेत्र और भी बेहतर होगा।
वर्षवार डॉल्फिन गणना
2015 22
2016 30
2017 32
2018 33
2019 35
2020 41
(बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक)
यहां-यहां मिलीं डॉल्फिन
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सीनियर कोआर्डिनेटर संजीव यादव ने बताया कि इस बार गणना दो बोट पर अलग-अलग टीमों द्वारा की गई। उन्होंने बताया कि सात दिन चली गणना में बिजनौर बैराज से सिरजेपुर मुजफ्फरनगर के 25 किलोमीटर क्षेत्र में 07 डॉल्फिन मिलीं। सिरजेपुर से कुंडा गांव तक 31 किलोमीटर के इलाके में 13 डॉल्फिन मिलीं। कुंडा से तिगरी तक हापुड़ क्षेत्र में 10 डॉल्फिन मिली हैं। इनमें कई डॉल्फिन ने सिरजेपुर क्षेत्र से इधर मूव किया है। तिगरी से भगवानपुर तक 30 किलोमीटर तमक हापुड़ और अमरोहा के क्षेत्र में तीन डॉल्फिन मिली हैं। भगवानपुर से अनूपशहर तक 38 किलोमीटर के क्षेत्र में दो डॉल्फिन मिली हैं। अनूपशहर से नरोरा बैराज तक 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र में छह डॉल्फिन मिली हैं।
ये रहे मौजूद
ऑनलाइन कार्यक्रम में संजय श्रीवास्तव एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेट्री कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, सुरेश बाबू, मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन एनके जानू, डीएफओ मेरठ अदिति शर्मा, डीएफओ बिजनौर एम. सैमारन, बिजनौर हापुड़ दीक्षा भंडारी, बुलंदशहर डीएफओ गंगा प्रसाद, मुजफ्फरनगर डीएफओ सूरज आदि मौजूद रहे।
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