मेरठ में संतोष कुमार की मौत के मामले में हुई लापरवाही में उस दिन ड्यूटी पर रहे प्रभारियों पर कार्रवाई की रूपरेखा तैयार हो गई है। छह से ज्यादा चिकित्सीय स्टाफ पर कार्रवाई होगी। बुधवार देर रात कमेटी ने मामले की रिपोर्ट प्रिंसिपल को सौंप दी है। उनका कहना है कि अभी कार्रवाई के लिए मंथन चल रहा है।
प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार का कहना है कि यह लापरवाही का मामला है। कार्रवाई तय है। मरीज को भर्ती करने वाले स्टाफ के बयान से जांच टीम संतुष्ट नहीं है। ऐसा कैसे हो सकता है कि मरीज भर्ती करते समय, नाम, पता होने के बावजूद मोबाइल नंबर न लिया हो। अगर मरीज के बारे में पूछा जा रहा था तो तस्दीक क्यों नहीं की गई कि कौन सा मरीज था। नाम लिखा होने के बावजूद अज्ञात क्यों माना गया। कर्मचारी इन तमाम सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में लापरवाही की इंतहा हुई थी, जिस संतोष कुमार (64) को उनके परिजन तलाश रहे थे, उनकी मृत्यु तो भर्ती करने के तीसरे दिन ही हो गई थी। अंतिम संस्कार भी अज्ञात में करा दिया गया था। इसकी भनक तक नहीं दी गई थी, बल्कि उनको 10 दिन बाद तक भी यही बताते रहे थे कि वह जिंदा है और उनका इलाज चल रहा है। प्राचार्य ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसमें के. एन. तिवारी और ज्ञानेश्वर टांक शामिल थे।
जांच के दौरान पता चला है कि संतोष कुमार की तीन दिन बाद ही मौत हो गई थी। उस समय संतोष नाम के तीन मरीज भर्ती थे। गलती से दूसरे नाम के मरीज के बारे में जानकारी दी गई थी। जो डेड बॉडी पैक करते समय बॉडी बैग पर भी स्लिप नहीं लगाई थी, जबकि उनकी फाइल पर नाम संतोष लिखा हुआ था। उनके पैर पर नाम नहीं लिखा था, जबकि स्टॉफ नाम लिखता है।