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खतरे में मासूमों की जान: गजब है हाल, ट्रक के नंबर पर स्कूल वाहन, बिना फिटनेस के दौड़ रहीं 461 बसें, पढ़ें खास रिपोर्ट

Fri, 22 Apr 2022 02:11 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ में बिना फिटनेस के दौड़ रहीं स्कूल बसें। - फोटो : amar ujala
मोदीनगर में स्कूल बस हादसे में दस वर्षीय अनुराग की मौत के बाद भी जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी है। मेरठ में भी 461 स्कूल बसें बिना फिटनेस दौड़ रही हैं। माल ढोने वाली टाटा 407 के नंबर पर भी स्कूल बस चल रही है। आरटीओ, प्रशासन या पुलिस ने इन वाहनों की चेकिंग तक नहीं की। 

मेरठ में वेस्ट एंड रोड पर 22 फरवरी को स्कूली बच्चों से भरा टेंपो पलटने से कक्षा छह के छात्र अगस्त्य उर्फ वासु की मौत हो गई। अगले दिन ही हस्तिनापुर में स्कूल बस के नीचे आने से पांच वर्षीय दीपाली ने दम तोड़ दिया। इन दर्दनाक हादसों के बावजूद खटारा बसों पर लगाम नहीं है।
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खतरें में मासूमों की जान। - फोटो : amar ujala
वहीं गुरुवार को अमर उजाला टीम ने वेस्ट एंड रोड समेत शहर के कई इलाकों का हाल देखा तो स्कूल बसों के शीशों के बाहर लगने वाली सेफ्टी ग्रिल गायब मिली। वेस्ट एंड रोड पर छात्रों को ले जा रही एक स्कूल बस का नंबर आरटीओ में चेक किया गया तो वहां यह माल ढोने वाले ट्रक के रूप में दर्ज मिली। एक अन्य स्कूल वाहन की फिटनेस खत्म है। इसे आरटीओ ने ब्लैक लिस्ट कर रखा है। यहीं के एक स्कूल का वाहन टूरिस्ट बस के रूप में पंजीकृत है। इस बस में शीशों के बाहर सेफ्टी ग्रिल भी नहीं लगी है। कुछ ऐसी बसें भी मिलीं जिनमें ग्रिल टूटी हैं या कम हैं। बच्चे इनसे आसानी से सिर बाहर निकाल लेते हैं।
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खतरे में मासूमों की जान। - फोटो : amar ujala
बस रंग ही पीला, बाकी कोई मानक नहीं पूरा
- बस पर स्कूल का नाम, फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
- स्कूल बसों की अधिकतम अवधि 15 वर्ष है।
- स्कूल बस में छात्रों की सूची, नाम, पता, कक्षा, ब्लड ग्रुप और रूट नंबर लिखा होना चाहिए।
- बस में चालक के अलावा अनुभवी पुरुष या महिला सहायक तैनात होने चाहिए।
- बस चालक और सहायक निर्धारित ड्रेस में रहें।
- बस का रंग पीला होना चाहिए। 

आधे से ज्यादा स्कूल वाहनों में इन नियमों का भी पालन नहीं
- सीटिंग क्षमता अनुसार प्रत्येक बस में अग्निशमन यंत्र होने चाहिए।
- बस की बॉडी स्टील की और पूरी तरह बंद हो।  
- बस में कैनवास की छत न हो। 
- सीएनजी वाहनों की तिमाही चेकिंग अधिकृत केंद्र से कराई जाए। 
- प्रेशर हॉर्न प्रतिबंधित है। 
- सीट आरामदेह हो, सेफ्टी बेल्ट, आर्मरेस्ट होना अनिवार्य। 
- शीशों के बाहर सेफ्टी ग्रिल अनिवार्य, ताकि बच्चे सर बाहर न निकाल सकें।

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खतरे में मासूमों की जान। - फोटो : amar ujala
45 स्कूलों को दिए नोटिस 
जनपद के 45 स्कूलों को नोटिस भेजे गए हैं। अभियान चलाकर बसों की चेकिंग कराई जाएगी। अगर स्कूल बसों में सुरक्षा मानक नहीं मिलेंगे तो उन्हें सीज किया जाएगा। - हिमेश तिवारी, आरटीओ मेरठ

ली जाएगी रिपोर्ट 
परिवहन विभाग से स्कूल बसों की फिटनेस, परमिट, प्रदूषण और बीमा आदि की पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। इसके साथ ही बसों की चेकिंग और चालान का रिकॉर्ड भी देखा जाएगा। बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। - दिवाकर सिंह, एडीएम सिटी
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बिना फिटनेस के दौड़ रही स्कूल बसें। - फोटो : amar ujala
रेडिएटर फटने से झुलसे बच्चों की हालत में सुधार 
दशरथपुर स्थित कुसुम पब्लिक स्कूल की बस का बुधवार को रेडिएटर फटने से झुलसे सकौती निवासी छात्र काव्य अग्रवाल, टांडा निवासी शिवम की हालत में बृहस्पतिवार को सुधार आया है। वहीं मामूली रूप से झुलसे तीन अन्य बच्चों की हालत ठीक है।

देहात के स्कूलों में चल रहीं जर्जर बसें
परिवहन के नाम पर देहात क्षेत्र के कई स्कूल अभिभावकों से मनमानी पैसे वसूल रहे हैं। बच्चों को स्कूल लाने और घर छोड़ने के लिए खटारा बसों का प्रयोग किया जा रहा है।
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