पीड़ित पक्ष की तरफ से सीनियर अधिवक्ता अनिल बख्शी का कहना है कि सभी गवाहों ने आरोपियों के खिलाफ मजबूत गवाही दी है। दोनों बेटों और पति के हत्यारोपियों को सजा दिलाने के लिए सुरैया अकेली पैरवी कर रही थी। इस केस में 13 अगस्त 2010 को मुकदमे के वादी इनाम की गवाही शुरू हुई और सुरैया समेत 16 गवाहों के बयान लगभग पांच साल तक चले। सुरैया इंसाफ के लिए लगातार कोर्ट जाती थी। उसकी मौत हो गई। अब मामला न्यायालय में वास्ते बहस न्यायालय स्पेशल कोर्ट एंटी करप्शन के यहां विचारणीय चला आ रहा है।
सोतीगंज में अभी भी तनाव
दोनों का परिवार सोतीगंज में रहता है। दो सगे भाई और पिता की हत्या होने के बाद से सोतीगंज में तनाव की स्थिति बनी है। कई बार दोनों पक्ष ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर झूठे मुकदमे दर्ज कराने का प्रयास किये। समझौते के कई बार दबाव डाले गए। लेकिन पीड़ित परिवार इसे मानने को तैयार नहीं है। वहीं, इसी मामले में आरोपियों के खिलाफ तत्कालीन थानाध्यक्ष मोहन लाल द्वारा अवैध हथियार रखे जाने के आरोप में भी मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। वह भी विचाराधीन है।
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