चार दिन बाद पुलिस ने कनैनी गांव पहंचकर परिजनों को बताया था कि सोनू ने हवालात में फांसी लगा ली है। पंचनामे पर हस्ताक्षर कराकर सोनू का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। सोनू के परिजनों की तरफ से इंस्पेक्टर मिथलेश उपाध्याय समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ पुलिस हिरासत में मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष अदालत चला गया, जहां से शासन को इस प्रकरण की जांच कराने के आदेश हुए थे।
मामले की जांच मेरठ सीबीसीआइडी यूनिट को दी गई थी। जांच अधिकारी सीओ राशिद अली ने जांच में इंस्पेक्टर मिथलेश उपाध्याय, रिटायर दारोगा रामसेवक और ओमप्रकाश, हेड कांस्टेबल प्रदीप और कांस्टेबल सौरभ, जीवन लाल तथा दो होमगार्ड को आरोपी मानते हुए सभी के खिलाफ चार्जशीट लगाकर शासन को पत्रावली भेज दी थी। जिस पर शासन ने सभी को दोषी मानते हुए उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं।
इंस्पेक्टर मिथलेश उपाध्याय इस समय सहारनपुर में तैनात है, रामसेवक और ओमप्रकाश आगरा में रहते हैं। प्रदीप, सौरभ और जीवन लाल बुलंदशहर में तैनात हैं।
सभी जनपदों के एसएसपी को पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं। सीबीसीआईडी ने इस मामले में युवती के बयानों को भी अहम माना। युवती ने मजिस्ट्रेट को बयान दिए थे कि सोनू को पुलिस के हवाले कर दिया था। पुलिस ने सोनू को हवालात में डालकर युवती को उसके परिजनों को सौंप दिया था।
एसएसपी को दिए गिरफ्तारी के आदेश
जांच में सभी आरोपी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं। कोर्ट में चार्जशीट जमा कर दी गई है। शासन को भी रिपोर्ट भेज दी है। तीन जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को भी उनकी गिरफ्तारी के लिए शासन ने आदेश कर दिया है। इस संबंध में सीबीसीआईडी ने भी संबंधित जनपद के अधिकारियों से पत्राचार किया है। - अलका सिंह, एसपी, सीबीसीआईडी