यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित हो गया है। रिजल्ट की सूचना के साथ ही छात्र-छात्राओं में बेचैनी बढ़ गई है, लेकिन रिजल्ट को लेकर उदास न हों। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योंकि फेल या पास होना आपका जीवन तय नहीं करता है। अभिभावकों को चाहिए कि छात्र-छात्राओं का मनोबल बढ़ाएं। अगर यूपी बोर्ड रिजल्ट उदास करने वाला हो तो समझाएं, हौसला बढ़ाएं।
इस साल मेरठ में पंजीकृत परीक्षार्थी की संख्या 86607 है, जिनमें हाईस्कूल 43499 और इंटरमीडिएट 43108 हैं। ये यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से जारी संख्या है, जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से यह संख्या 86402 है। यह फर्क क्यों, इसकी जांच की जा रही है।
वहीं, परीक्षा में अनुपस्थित रहे करीब आठ हजार रिजल्ट आने से पहले ही फेल हो गए हैं। यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले 17 जिलों के 10 लाख, 89 हजार 91 छात्रों को भी परीक्षा परिणाम का इंतजार है। इनमें पांच लाख 70 हजार 252 परीक्षार्थी हाईस्कूल और पांच लाख 18 हजार 839 परीक्षार्थी इंटरमीडिएट में पंजीकृत हैं। इनमें 66 हजार 455 छात्र ऐसे हैं, जिन्होंने परीक्षा नहीं दी है।
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वर्ष 2019 में यूपी बोर्ड हाईस्कूल में मेरठ का प्रदेश में छठा स्थान था, जो 2018 में 8वां था। हालांकि इंटर में प्रदर्शन गिरा था। 2018 में 19वां स्थान था, जो 2019 में 28वां हो गया था। वर्ष 2017 में हाईस्कूल में 34वें और इंटरमीडिएट में 38वें स्थान पर था। वर्ष 2016 में हाईस्कूल में 37वें और इंटरमीडिएट में 50वें स्थान पर था।
पहली बार इंटरमीडिएट में भी कंपार्टमेंट की सुविधा शुरू की जा रही है। एक विषय में फेल विद्यार्थी कंपार्टमेंट दे सकता है। वहीं हाईस्कूल में पांच विषय में पास व एक में फेल को पास माना जाता है। विद्यार्थी इंप्रूवमेंट की परीक्षा दे सकता है। दो विषय में फेल पर वह कंपार्टमेंट दे सकता है।
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