यहां से धधकी थी स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला
जी हां, यह वही जगह है। जहां से स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा। 9 मई साल 1857 की रात को मेरठ छावनी के 85 सैनिकों, ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया। दरअसल, मेरठ छावनी में चर्बी वाले कारतूस और हड्डियों के चूर्ण वाले आटे की बात गोपनीय तरीके से सैनिकों में पहुंच गई, जिसके बाद सभी सैनिकों ने अंग्रेजों को सबक सिखाने की ठान ली। धनसिंह के नेतृत्व में क्रांतिकारी भीड़ ने रात दो बजे मेरठ जेल पर हमला कर दिया और जेल तोड़कर 836 कैदियों को छुड़ा लिया। जेल से छूटे सभी कैदी क्रांति में शामिल हो गए। यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक सशस्त्र विद्रोह था। यह विद्रोह दो वर्षों तक भारत के विभिन्न क्षेत्रों में चला।