जमीयत उलमा-ए-हिंद के जिला महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने कहा कि सीरियल बनाने हैं तो अन्य मुद्दे भी बहुत हैं। समाज की शिक्षा, गरीबी के साथ बेटियों की शिक्षा, समान अधिकार आदि पर बनाए जाएं। धार्मिक मसलों पर किसी को भी इस तरह से किस्से, कहानी सीरियल बनाने का कोई अधिकार नहीं है। सीरियल की कहानी को दिखवाया जा रहा है। उसके बाद संगठनात्मक रूप से कार्य किया जाएगा।
सीरियल की थीम
सीरियल में जो किरदार रखे गए हैं, उनमें लड़की को खुले विचार और लड़के को धार्मिक रस्मो-रिवाज का पाबंद दिखाया गया है। दोनों की शादी के बाद तलाक का किस्सा है, जो तीन तलाक पर है। इसमें एक महिला को तीन तलाक के बाद दोनों की जिंदगी और कार्य को दर्शाया जा रहा है।
यूट्यूब पर छाया ट्रेलर
सीरियल का यू-ट्यूब पर ट्रेलर छाया हुआ है। फसाद के बीच महिला का मदद के लिए मस्जिद में घुसना, मौलवियों को मशविरा आदि देने का वीडियो खूब देखा जा रहा है।
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