उल्देपुर में धरने पर बैठे लोग, आश्वासन पर माने
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मेरठ के उल्देपुर गांव में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन और मेरठ विकास प्राधिकरण के सामने कार्रवाई की रणनीति तैयार करने की चुनौती है। अब यह भी जांच का विषय होगा कि महज पांच साल में इतनी बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां कैसे विकसित हुईं और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। बृहस्पतिवार को मेडा अधिकारियों ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर मंथन किया।
कुंज और एंक्लेव के नामों से बदली गांव की पहचान
उल्देपुर में विकसित की गई कॉलोनियों के नाम भी चर्चा में हैं। बजरंग कुंज, श्याम कुंज, कैलाश कुंज, माधव कुंज, कृष्ण कुंज, विनायक कुंज, अमर कुंज, सावरिया कुंज, शिव कुंज, वासुदेव कुंज, गोधाम और तीरपाल एंक्लेव जैसे नाम रखे गए हैं। गांव में बड़ी संख्या में कॉलोनियां विकसित होने से स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि कुछ ही वर्षों में गांव का स्वरूप कैसे बदल गया।
पांच साल में कैसे विकसित हुईं इतनी कॉलोनियां
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत न्यायिक आयोग यह भी जांच करेगा कि पांच साल में उल्देपुर गांव में अवैध कॉलोनियां कैसे विकसित होती रहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की।
बताया गया है कि उल्देपुर लाल डोरा जोन घोषित क्षेत्र है। इसके बावजूद यहां लगातार कॉलोनियां विकसित होती रहीं। मेडा ने सुप्रीम कोर्ट में उल्देपुर में 100 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित होने की बात स्वीकार की है।
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पहले भी हुई कार्रवाई, फिर विकसित हो गईं कॉलोनियां
उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ पहले भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। मेडा के अनुसार, तीन साल में विकसित हुई अवैध कॉलोनियों पर एक-एक बार बुलडोजर चलाया गया। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर दोबारा कॉलोनियां विकसित होने की बात सामने आई है।
दोबारा अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। अब मेडा पुलिस से इन मामलों में हुई कार्रवाई की जानकारी जुटा रहा है। शुक्रवार को प्राधिकरण की ओर से थाना पुलिस से भी संपर्क किया गया।
बिजली कनेक्शन और रजिस्ट्री पर भी सवाल
मेडा का कहना है कि कार्रवाई के बावजूद अवैध कॉलोनियों में विद्युत विभाग की ओर से बिजली के खंभे और लाइनें शुरू हो गईं। इसके अलावा प्लॉट की रजिस्ट्री भी लगातार होने की बात कही गई है। इन मामलों को लेकर प्राधिकरण की ओर से विद्युत विभाग और रजिस्ट्री विभाग के साथ पत्राचार किए जाने की बात कही गई है।
नौ दिसंबर को देनी है ध्वस्तीकरण की रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मेडा उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण की रणनीति तैयार कर रहा है। नौ दिसंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में ध्वस्तीकरण की रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है। कार्रवाई के दौरान पुलिस-प्रशासन के सामने भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहेगी, क्योंकि ध्वस्तीकरण की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों में विरोध सामने आ रहा है।
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
न्यायिक आयोग की जांच में यह भी सामने आना है कि अवैध कॉलोनियों के विकास के दौरान संबंधित विभागों की भूमिका क्या रही। कॉलोनियां किस तरह विकसित हुईं और उस दौरान जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की, इसका रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है।
उल्देपुर में प्राधिकरण द्वारा पहले भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। जिन-जिन अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई हुई, उनका रिकॉर्ड है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है और उसका पालन किया जाएगा। -संजय कुमार मीना, उपाध्यक्ष, मेडा