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ध्वस्तीकरण का डर: अधिकारियों के आश्वासन के बाद माने कॉलोनी मालिक व भूखंड खरीदार

Sat, 26 Sep 2026 11:45 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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उल्देपुर में अनिश्चित कालीन धरना - फोटो : अमर उजाला
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उल्देपुर क्षेत्र में बिना मानचित्र के विकसित हो रही कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार को कॉलोनी मालिकों के साथ मकान और भूखंड खरीद चुके लोग भी एकजुट होकर उल्देपुर पहुंचे। 

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रविंद्र गुर्जर के नेतृत्व में सुबह नौ बजे अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। लोगों ने कहा कि किसी भी कीमत पर लोगों के मकान नहीं टूटने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा, अब मेरठ से दूसरी क्रांति शुरू होगी, जरूरत पड़ी तो आंदोलनकारी बुलडोजर के आगे लेटकर अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में इस कार्रवाई का असर देखने को मिलेगा। सूचना पर एडीएम सिटी बृजेश सिंह और एसपी सिटी विनायक गोपाल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दस लोगों की डीएम से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद लोगों ने करीब नौ घंटे बाद धरना स्थगित कर दिया।
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शुक्रवार को उल्देपुर में मेरठ बचाओ आंदोलन के बैनर तले टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। धरने में कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों के साथ कॉलोनी विकसित करने वाले और संपत्ति खरीदने वाले लोग भी शामिल हुए।

लोगों का कहना है कि वर्षों से इन कॉलोनियों में मकान और भूखंड की खरीद-फरोख्त होती रही, लेकिन उस समय संबंधित विभागों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। अब न्यायालय के आदेश के बाद लोगों के सामने अपने आशियाने और निवेश को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।

आगे के आंदोलन पर हुई चर्चा
कॉलोनी स्वामी प्रदीप कुमार, जॉन धनकड़ और ओमप्रकाश पाल ने कहा कि समस्या केवल कॉलोनी विकसित करने वालों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में ऐसे परिवार भी हैं जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यहां मकान या भूखंड खरीदा है। कई लोग वर्षों से इन कॉलोनियों में रह रहे हैं।

ऐसे में किसी भी कार्रवाई का असर सीधे इन परिवारों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को प्रशासन और शासन तक पहुंचाने के लिए आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। पंचायत में धरने को लगातार जारी रखने और अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

वार्ता करते अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
जब कॉलोनियां विकसित हो रही थीं, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई
धरने में शामिल लोगों ने सवाल उठाया कि यदि कॉलोनियां नियमों के विपरीत विकसित की जा रही थीं तो संबंधित विभागों ने उसी समय कार्रवाई क्यों नहीं की। लोगों का कहना है कि एक के बाद एक कॉलोनियां विकसित होती रहीं और उनमें लोगों ने अपनी जमा पूंजी लगाकर मकान बनाए। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई की स्थिति बनने पर सबसे अधिक चिंता उन परिवारों को है, जिन्होंने अपनी जिंदगी की कमाई घर बनाने में लगा दी है।

रात में नहीं लग सका टेंट सुबह जुटी भीड़
आंदोलन स्थल पर रात में पुलिस ने टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटे। इसके बाद टेंट लगाया गया। आंदोलनकारियों ने मकानों और दुकानों पर कार्रवाई रोकने तथा प्रभावित लोगों को राहत देने की मांग की। मौके पर लोगों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही। इस दौरान रविन्द्र चौहान, जॉन धनकड़, प्रदीप, बबलू, मनोज, अजय त्यागी, ओमप्रकाश पाल, सनी, सोनू, गौरव, शीतल चौहान, प्रवीण, विजय राघव और उपेंद्र प्रधान आदि मौजूद रहे।
 
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बड़ी कंपनियों के अवैध निर्माण को भी दें नोटिस
मोदीपुरम। धरने में लोगों ने आरोप लगाया कि कारपोरेट जगत को लाभ पहुंचाने तथा जमीनों को हड़पने का षड्यंत्र किया जा रहा है। उनका दावा है कि शहर में बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के 1000 से ज्यादा अवैध निर्माण हैं लेकिन उन्हें कोर्ट में पेश की गई सूची में शामिल नहीं किया गया है। 

लोगों ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि एक सप्ताह के भीतर इन 1000 अवैध निर्माणों की सूची कोर्ट में पेश की जाए। ऐसा नहीं होने पर संगठन इस सूची को लेकर संबंधित अधिकारियों को नोटिस देगा और सुप्रीम कोर्ट को इस मनमानी की जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि ध्वस्तीकरण होना है तो कार्रवाई सबसे पहले बड़ी कंपनियों और कॉरपोरेट के अवैध निर्माणों पर की जाए। इसके बाद आम आदमी अपने निर्माण को खुद ही तोड़ लेगा।

शुक्रवार को आंदोलन के दौरान अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने कहा कि यह आंदोलन जल्द ही मेरठ शहर तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 16 हजार से अधिक मकानों और दुकानों को सील करने और अब 150 से अधिक कॉलोनियों को तोड़ने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कार्रवाई को लेकर सरकार से जनता को राहत देने की मांग की। रविंद्र गुर्जर ने कहा कि यदि मकानों और दुकानों को हटाया जाना जरूरी है तो पहले भवन स्वामियों को मुआवजा, पैसा या दूसरा मकान उपलब्ध कराया जाना चाहिए था। 
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