शुक्रवार को उल्देपुर में मेरठ बचाओ आंदोलन के बैनर तले टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। धरने में कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों के साथ कॉलोनी विकसित करने वाले और संपत्ति खरीदने वाले लोग भी शामिल हुए।
लोगों का कहना है कि वर्षों से इन कॉलोनियों में मकान और भूखंड की खरीद-फरोख्त होती रही, लेकिन उस समय संबंधित विभागों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। अब न्यायालय के आदेश के बाद लोगों के सामने अपने आशियाने और निवेश को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।
आगे के आंदोलन पर हुई चर्चा
कॉलोनी स्वामी प्रदीप कुमार, जॉन धनकड़ और ओमप्रकाश पाल ने कहा कि समस्या केवल कॉलोनी विकसित करने वालों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में ऐसे परिवार भी हैं जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यहां मकान या भूखंड खरीदा है। कई लोग वर्षों से इन कॉलोनियों में रह रहे हैं।
ऐसे में किसी भी कार्रवाई का असर सीधे इन परिवारों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को प्रशासन और शासन तक पहुंचाने के लिए आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। पंचायत में धरने को लगातार जारी रखने और अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
बड़ी कंपनियों के अवैध निर्माण को भी दें नोटिस
मोदीपुरम। धरने में लोगों ने आरोप लगाया कि कारपोरेट जगत को लाभ पहुंचाने तथा जमीनों को हड़पने का षड्यंत्र किया जा रहा है। उनका दावा है कि शहर में बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के 1000 से ज्यादा अवैध निर्माण हैं लेकिन उन्हें कोर्ट में पेश की गई सूची में शामिल नहीं किया गया है।
लोगों ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि एक सप्ताह के भीतर इन 1000 अवैध निर्माणों की सूची कोर्ट में पेश की जाए। ऐसा नहीं होने पर संगठन इस सूची को लेकर संबंधित अधिकारियों को नोटिस देगा और सुप्रीम कोर्ट को इस मनमानी की जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि ध्वस्तीकरण होना है तो कार्रवाई सबसे पहले बड़ी कंपनियों और कॉरपोरेट के अवैध निर्माणों पर की जाए। इसके बाद आम आदमी अपने निर्माण को खुद ही तोड़ लेगा।
शुक्रवार को आंदोलन के दौरान अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने कहा कि यह आंदोलन जल्द ही मेरठ शहर तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 16 हजार से अधिक मकानों और दुकानों को सील करने और अब 150 से अधिक कॉलोनियों को तोड़ने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कार्रवाई को लेकर सरकार से जनता को राहत देने की मांग की। रविंद्र गुर्जर ने कहा कि यदि मकानों और दुकानों को हटाया जाना जरूरी है तो पहले भवन स्वामियों को मुआवजा, पैसा या दूसरा मकान उपलब्ध कराया जाना चाहिए था।