शादी में आतिशबाजी और डीजे बजाने से नाराज उलेमा ने शनिवार को एक शादी समारोह में निकाह पढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिजनों ने निकाह की रस्म पूरी कराने के लिए गजियाबाद से उलमा को बुलाया और बेटी को विदा किया। कस्बे में पूरे दिन यह मामला चर्चा में रहा।
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कस्बे की मस्जिद के काजी मो. शामिल और काजी सद्दाम हुसैन ने बताया कि करीब तीन माह पूर्व श्यामपुर स्थित मदरसे में सभी उलमा की बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया था कि मुस्लिम समाज की शादियों में डीजे बजाने, खडे़ होकर खाना खिलाने, आतिशबाजी आदि करने वालों के यहां कोई निकाह नहीं पढ़ाएगा। उलमा का कहना है कि शरीयत इसकी इजाजत नहीं देता है।
काजी सद्दाम हुसैन ने बताया कि कस्बे के एक व्यक्ति की बेटी की शादी शनिवार को होनी थी। तीन दिन से लगातार आतिशबाजी और डीजे चल रहा था। जानकारी होने पर उलमा उनके घर पहुंचे और आपत्ति जताई। उक्त परिवार ने समारोह में आतिशबाजी नहीं करने की बात कही, लेकिन वह इस हरकत से बाज नहीं आए। इसके बाद शनिवार को कस्बे के सभी उलमा ने निकाह पढ़ाने से इनकार कर दिया।