मेरठ। योग हमारे सोचने, समझने और जीने के तरीके को प्रभावित करता है। सत्यनिष्ठा, परिशुद्ध आचरण और सेवा भाव योग के मूल स्तंभ हैं। नियमित रूप से सुबह और शाम किए जाने वाले सात सूत्रीय प्राणायाम, नाड़ी शुद्धि, अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, उद्गीथ, उज्जायी आदि शरीर के लिए लाभदायक है। यह बात चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में चल रहे हैं योग शिविर के दौरान बृहस्पतिवार को स्वामी कर्मवीर महाराज ने कहीं।
उन्होंने कहा कि उज्जायी प्राणायाम क्रिया थायरॉयड ग्रंथि को सक्रिय करती है। योग केवल शारीरिक अभ्यास का नहीं, बल्कि समग्र जीवन व्यवहार का नाम है। उन्होंने कहा कि जब विचार और व्यवहार में समानता होती है, तब ही व्यक्ति मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त कर सकता है। प्राणायाम से मन शांत होता है, क्रोध और तनाव समाप्त होता है और चिंतन शक्ति बढ़ती है। हमें कभी भी क्रोध नहीं करना चाहिए। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, प्रति कुलपति प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार यादव, वित्त अधिकारी रमेश चंद्र आदि मौजूद रहे।