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यूआईएन ने घटाए 5 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस  

Wed, 30 Mar 2016 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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लाइसेंसी हथियार। - फोटो : फाइल फोटो
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यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) प्रक्रिया लागू होते ही मेरठ में बने पांच हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस घट गए। शस्त्र लाइसेंस धारकों को यूआईएन उनके शस्त्र आवेदन की संस्तुति पर नहीं बल्कि नवीनीकरण के आधार पर दिया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि इतनी संख्या में शस्त्र लाइसेंस घटने के कारणों की जांच कराई जा रही है।
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ये है यूआईएन 
शस्त्र लाइसेंस को लेकर उठने वाले सवालों और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योजना तैयार हुई। जिसके तहत पूरे विश्व के शस्त्र लाइसेंसों का डाटा तैयार करने का प्लान तैयार किया गया। लाइसेंस धारक का फोटो, नाम, पता, शस्त्र लाइसेंस नंबर, शस्त्र का बोर और उसका नंबर ऑनलाइन फीड करते हुए उसका नंबर जारी किया गया। यह नंबर ही यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) कहलाता है। इस यूआईएन को साइट पर डालने पर शस्त्र लाइसेंस धारक का पूरा रिकॉर्ड सामने आ जाता है। जिससे साफ हो जाता है कि शस्त्र धारक वैध है या अवैध।

मेरठ में ऐसे हुआ काम 
शासन के निर्देश पर यूआईएन सिर्फ उन्हीं लोगों को जारी किया गया, जिनका शस्त्र लाइसेंस का एक अक्तूबर 2012 से 30 सितंबर 2015 के बीच नवीनीकरण हुआ है। इस आदेश के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि शस्त्र लाइसेंस भले ही मेरठ से बना हो, लेकिन यदि उसने नवीनीकरण किसी दूसरे जनपद या प्रदेश में कराया है, जहां वह वर्तमान में रह रहा है तो उसे यूआईएन वहीं से जारी किया जाएगा। ऐसे ही जिन लोगों के शस्त्र लाइसेंस बाहर से बने हैं, लेकिन मेरठ में उन्होंने नवीनीकरण कराया है तो उन्हें मेरठ प्रशासन की तरफ से यूआईएन जारी किया गया। 
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घट गए धारक 
मेरठ में जो डाटा शस्त्र लाइसेंस धारकों का दिया जाता था, उसके अनुसार करीब 22 हजार शस्त्र लाइसेंस धारक थे। लेकिन यूआईएन जारी करते हुए जब इनकी छंटनी की गई और डाटा तैयार किया गया तो यहां इनकी संख्या मात्र 16730 रह गई। इनमें से 16423 शस्त्र लाइसेंस को यूआईएन जारी कर दिया गया है। 

31 मार्च तक मौका
शासन का सख्त आदेश है कि यदि 31 मार्च तक शस्त्र लाइसेंस धारक ने यूआईएन नहीं लिया तो एक अप्रैल को उसका शस्त्र लाइसेंस स्वत: ही निरस्त हो जाएगा। ऐसे में तमाम लोग कलक्ट्रेट स्थित शस्त्र अनुभाग में चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन इनमें वो लोग भी हैं, जिन्होंने न तो मेरठ में लाइसेंस बनवाया है और न ही यहां नवीनीकरण कराया है। यही नहीं ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने शस्त्र तो मेरठ से बनवाया, लेकिन उसका नवीनीकरण दूसरे जनपद में करा लिया।
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