सीओ दौराला पंकज सिंह और इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा दीपक शर्मा मौके पर पहुंचे तो उन्होंने ग्रामीणों को समझाकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी की। लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें शव नहीं उठाने दिया। प्रशासन और बिजली विभाग के बड़े अफसरों को बुलाने की मांग पर अड़ गए। जिसके बाद एसडीएम सरधना और अधिशासी अभियंता मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों को खूब खरी खोटी सुनाई।
आग लगा दो, हाइवे जाम कर दो
ग्रामीण दोनों भाइयों को मौके पर ही मुआवजा दिलाने की मांग पर अड़े रहे। जबकि एसडीएम और अधिशासी अभियंता पोस्टमार्टम के बाद मुआवजा दिलाने का आश्वासन देते रहे। सहमति न होने पर ग्रामीणों ने बिजलीघर में आग लगाने और हाइवे जाम करने का ऐलान किया तो हड़कंप मच गया। अफसरों ने डीएम से फोन पर वार्ता की। जिसके बाद दोनों मजदूरों के परिवार को 1-1 लाख रुपये के चेक मौके पर भिजवाए गए। एसडीएम ने 4-4लाख रुपये और मुआवजा प्रशासन की ओर से दिलवाने का आश्वासन दिया। तब जाकर ग्रामीणों ने शव उठने दिए।
साथ रहे, साथ ही मरे
ग्रामीणों के अनुसार सोनू और बंटी की बचपन से ही दोस्ती थी। प्राइमरी तक साथ पढ़े। लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण एक साथ मजदूरी पर जाना शुरू कर दिया था। दोनों साथ जीने और साथ मरने की बात कहते थे। सोनू को तड़पता देख बंटी ने उसका हाथ पकड़कर बिजली के करंट से छुड़ाने का प्रयास किया था। लेकिन वह भी सोनू के साथ मौत के मुंह में समा गया। परिजनों में कोहराम मचा है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/