हस्तिनापुर को कृष्ण सर्किट से जोड़कर रेल मार्ग की दें सौगात
मेरठ। एक बार फिर सदन में हस्तिनापुर के विकास का सवान उठाया गया। राज्यसभा सदस्य विजयपाल सिंह तोमर ने शून्यकाल के दौरान कृष्ण सर्किट में हस्तिनापुर का समावेश करने के प्रश्न को उठाया। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय से महज 38 किलोमीटर दूर ही हस्तिनापुर है जो महाभारतकाल में कौरवों की राजधानी था। वर्तमान हस्तिनापुर एक जैन तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। यहां लगभग रोजाना काफी संख्या में जैन तीर्थ यात्री जैन मंदिरों विशेषकर जंबूदीप के दर्शन के लिए आते हैं।
उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर का वास्तविक विकास हस्तिनापुर को रेल लाइन से सरधना और पानीपत से जोड़ने से होगा। पानीपत से कुरुक्षेत्र तक पहले से रेलवे लाइन मौजूद होने से हस्तिनापुर तथा कुरुक्षेत्र जुड़ जाएंगे। मेरठ से पानीपत रेल लाइन स्वीकृत हो चुकी है। वर्तमान में केंद्र सरकार ने कृष्ण सर्किट के तहत 12 स्थलों का चयन किया है। इनमें द्वारिका, नाथद्वारा, जयपुर, सीकर, कुरुक्षेत्र, मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना, नंदगांव, गोवर्धन तथा जगन्नाथपुरी हैं।
हस्तिनापुर के चारों तरफ महाभारतकालीन स्थल परीक्षतगढ़ में गांधारी तालाब तथा श्रृंगी ऋषि का आश्रम, बागपत में वार्णावत, बिजनौर जिले में विदुरकुटी, मुजफ्फरनगर जिले में शुक्रताल आदि हैं। हस्तिनापुर को कुरुक्षेत्र से जोड़ने से क्षेत्र में पर्यटन के विकास के साथ रोजगार का भी सृजन होगा। उन्होंने कहा कि पौराणिक तथा पर्यटन की दृष्टि से कृष्ण सर्किट तभी पूरा होगा जब हस्तिनापुर को शामिल कर रेलमार्ग से कुरुक्षेत्र को जोड़ा जाए।
---