सरकारी कर्मचारियों की भांति व्यापारियों को राहत मिले
- सरकार की रणनीति पर व्यापारी वर्ग उठाने लगा सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लॉकडाउन के 40 दिन बीत चुके हैं। इक्का-दुक्का कारोबार को छोड़ शेष सभी तरह के बाजार बंद हैं। ऐसे में सरकार की रणनीति अब व्यापारियों को नहीं सुहा रही। वह व्यापारी वर्ग के हितों को भुलाने का आरोप सरकार पर लगा रहे हैं।
लॉकडाउन के चलते बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज के अलावा छोटे-छोटे कारोबार भी बंद हैं। ऐसे कारोबारियों की संख्या काफी अधिक है जो लोन के जरिए अपने कारोबार को आगे बढ़ाते हैं। इसके लिए उन्हें ब्याज देना होता है। लॉकडाउन के 40 दिन बीत चुके हैं। ऐसे में बिना कारोबार संचालन लोन की किश्त देना व्यापारियों पर भारी पड़ रहा है। वह राहत की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार टैक्स न आने के कारण कर्मचारियों का वेतन रोकने को मजबूर है। अब जब व्यापारियों का व्यापार बंद है तो वह खुद अंदाजा लगाए कि व्यापारी बिना कारोबार के बैंक का टैक्स, किराया, बिजली बिल, हाउस टैक्स, गुड्स एंड सर्विस टैक्स, इनकम टैक्स, कर्मचारियों की सैलरी और बच्चों की स्कूल फीस कैसे दे सकते हैं।
व्यापारियों का यह है कहना
- व्यापारी अपने प्रतिष्ठान बंद रख सहयोग कर रहा है। आय का कोई साधन नहीं है। सरकार को ऐसी योजना बनानी चाहिए ताकि व्यापारियों को राहत मिले। - पुनीत शर्मा
- व्यापारियों का धैर्य जवाब दे रहा है। जब तक लॉकडाउन चल रहा है, तब तक व्यापारियों को टैक्स, बैंक ब्याज, इनकम टैक्स आदि में भी राहत मिलनी चाहिए। - राजीव सिंघल
- जिस प्रकार हम व्यापारी अपने घर पर रखी थोड़ी बहुत जमा पूंजी से काम चला रहे हैं, उसी तरह से सरकारी कर्मचारी भी चला लेंगे। सरकार उनका वेतन रोके। - अनमोल अग्रवाल