बृहस्पतिवार को सेंट्रल मार्केट को ध्वस्तीकरण से बचाने की गुहार व्यापारी, कर्मचारी और उनके परिवार के लोगों ने कलक्ट्रेट में लगाई। बात नहीं ये छोटी है, सबकी रोजी-रोटी है... जैसे नारे लगाए। सेंट्रल मार्केट को बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष का एलान किया गया।
प्रदर्शन के बाद व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल एडीएम सिटी से मिला। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई को संबोधित एक भावुक ज्ञापन एडीएम सिटी को सौंपा। व्यापारियों ने मांग की कि इस मामले को केवल कागजी कार्रवाई के तौर पर न देखा जाए, बल्कि इसमें मानवीय पहलू को भी शामिल किया जाए। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई कि जब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक बुलडोजर की कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। धरना-प्रदर्शन में मेरठ व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष जीतू नागपाल, महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा, संजय रोहतगी, नदीम सैफी, साबिर अली, विशाल बंसल, नईम, वसीम, सुदीप जैन,प्रकाश प्रसाद, संजीव रस्तोगी, ओमकार सिंह, यश मल्होत्रा और वरुण जैन शामिल थे।
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सैकड़ों घरों के चूल्हे बुझने का डर
व्यापारियों का कहना है कि सेंट्रल बाजार मेरठ की धड़कन है। यहां केवल बड़े शोरूम ही नहीं बल्कि हजारों छोटे दुकानदार, ठेला चलाने वाले और दिहाड़ी मजदूर भी काम करते हैं। अगर बाजार को तोड़ा गया तो लाखों लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। व्यापारियों ने साफ कहा कि हम कानून के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस कार्रवाई से सैकड़ों परिवारों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
व्यापारियों की मांगें:
ध्वस्तीकरण पर रोक: सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पुनर्वास की व्यवस्था: यदि हटाना जरूरी है, तो पहले व्यापारियों को कहीं और बसने की जगह दी जाए।
सुनवाई का मौका: प्रशासन और सरकार व्यापारियों का पक्ष भी सुने और बीच का रास्ता निकाले।