मवाना। भक्ति प्रकृति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आनंद के रंगों में सराबोर होकर भजनों का रसास्वादन किया। कथा में भक्त ध्रुव के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया।
हरिद्वार से पधारे मोहन गोकुलधाम पीठाधीश्वर कृष्णा संजय महाराज ने प्रवचन में भक्त ध्रुव के चरित्र का वर्णन किया और भक्ति में दृढ़ निश्चय एवं समर्पण का महत्व बताया। साथ ही, रंग पंचमी के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए वामन भगवान के दिव्य चरित्र की प्रमुख घटनाओं का भी उल्लेख किया। राजा बलि महान दानी थे और उन्होंने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया।
वह ब्राह्मण बालक बनकर राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे। वामन ने तीन पग भूमि दान में मांगी। बलि ने सहर्ष दान देने का वचन दिया। वामन ने एक पग में पृथ्वी और दूसरे में स्वर्ग नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए स्थान न होने पर बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान ने तीसरा पग उनके सिर पर रखकर उन्हें पाताल लोक का अधिपति बना दिया। भगवान ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर रक्षक बनने का वरदान दिया। इस कथा से हमें दान, विनम्रता और भक्ति की सीख मिलती है। आज के यजमान के रूप में गोपाल सराफ, मनोज दुबलिश, रेखा, महेश आर्य, संतोष सीना, विकल, पुष्पेंद्र आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।