मेरठ। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और कम शारीरिक गतिविधियों के कारण हड्डियों का दुश्मन ऑस्टियोपोरोसिस तेजी से पैर पसार रहा है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की हड्डी रोग ओपीडी में हर माह करीब 20 हजार मरीज आ रहे हैं। लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 20 अक्तूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं। इससे मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में पीठ दर्द, कद का धीरे-धीरे कम होना, अक्सर हड्डियों में दर्द और बिना वजह हड्डी टूटना शामिल है। यह समस्या विशेषकर रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है।
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. परवेज अहमद बताते हैं कि संतुलित आहार, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन-डी का सेवन, साथ ही नियमित व्यायाम हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार है। बाजार के जंक फूड, धूप से बचना, धूम्रपान और शराब जैसी आदतें हड्डियों को कमजोर बनाने के मुख्य कारण हैं। 30 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को हड्डियों की मजबूती पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हड्डियों की कमजोरी अक्सर बिना किसी लक्षण के बढ़ती रहती है। बोन मिनिरल डेन्सिटी ( बीएमडी) टेस्ट के जरिए इसका आसानी से पता चल सकता है।
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छोटे-छोटे उपायों से बड़ी राहत
- रोज सुबह कम से कम 15-20 मिनट धूप में समय बिताएं
- दूध, दही, पनीर और बादाम जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ लें
- ताजगी से भरपूर आहार और पर्याप्त पानी पीएं
- नियमित व्यायाम–योग और वॉक को दिनचर्या में शामिल करें
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें