चौधरी चरण सिंह ने किसानों की खुशहाली के लिए खेती पर बल दिया था। किसानों को उपज का उचित दाम मिल सके इसके लिए भी वह गंभीर थे। उनका कहना था कि भारत का संपूर्ण विकास तभी होगा जब किसान, मजदूर, गरीब सभी खुशहाल होंगे।
देश मे राष्ट्रपिता गांधी जी ने भी किसानों को ही देश का सरताज माना था, लेकिन देश की आजादी के बाद ऐसे नेता कम ही देखने में आए, जिन्होंने किसानों के विकास के लिए निष्पक्ष रूप से काम किया। ऐसे नेताओं में सबसे अग़्रणी थे देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह।
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आज ही के दिन 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह ने देश के पांचवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उनके पीएम बनने पर देश के किसानों में भारी खुशी हुई थी और उन्होंने दिल्ली में जाकर गुड़ बांटा था।
पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह को किसानों के अभूतपूर्व विकास के लिए याद किया जाता है। चौधरी चरण सिंह की नीति किसानों व गरीबों को ऊपर उठाने की थी। उन्होंने हमेशा यह साबित करने की कोशिश की कि बगैर किसानों को खुशहाल किए देश व प्रदेश का विकास नहीं हो सकता।
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चौधरी चरण सिंह ने किसानों की खुशहाली के लिए खेती पर बल दिया था। किसानों को उपज का उचित दाम मिल सके इसके लिए भी वह गंभीर थे। उनका कहना था कि भारत का संपूर्ण विकास तभी होगा जब किसान, मजदूर, गरीब सभी खुशहाल होंगे।
14 जनवरी 1980 को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी परंपरागत विधानसभा सीट छपरौली से 5 बार विधायक रहे चौधरी नरेन्द्र सिंह कहते है कि चौधरी साहब जैसी महान आत्मा सदियों में जन्म लेती है। उनका पूरा जीवन किसानों, मजलूमों और वंचितों की लड़ाई और उनके उत्थान में लगा रहा।
महात्मा गांधी के स्वप्न को बढ़ाया आगे
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि भारत का विकास गांव के विकास से जुड़ा है। गांव विकसित होंगे तो देश विकसित होगा। आजादी के बाद चौधरी चरण सिंह ने भी बापू के इसी स्वप्न को आगे बढ़ाने में जीवन समर्पित कर दिया। वह कहते थे कि देश की तरक्की का रास्ता खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है। आजादी के बाद भी ग्रामीणों को कुछ नहीं मिला। आधुनिक सुविधाएं महानगरों के आसपास स्थापित कर दी गई। यही वजह है कि गांव निरंतर पिछड़ते चले गए। - डॉ. राजकुमार सांगवान, संगठन महामंत्री, राष्ट्रीय लोकदल