जिन अस्पतालों को जोड़ा जाना है, उनके प्रबंधन से स्वास्थ्य विभाग की बात चल रही है। पुराने भी जो अस्पताल जुड़े हैं, वे अभी भी पैनल में शामिल हैं। अधिकांश अस्पतालों में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लग रहे हैं, ताकि ऑक्सीजन की किल्लत न हो।
तीसरी लहर की आशंका प्रबल होती जा रही है। मेरठ में महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर तैयारी कर रहा है। अब और निजी अस्पतालों को कोविड के इलाज के तहत जोड़ने की तैयारी की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की विपरीत परिस्थितियों से निपटा जा सके।
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दूसरी लहर में अस्पतालों में बेड के लिए मारामारी रही थी। सरकारी और निजी 39 अस्पतालों में 2986 बेड की व्यवस्था गई थी। इनमें से 1056 बेड पर पाइपलाइन से ऑक्सीजन की व्यवस्था है, जबकि 927 बेड पर सिलेंडर के जरिए ऑक्सीजन की व्यवस्था है।
बाकी बेड उन मरीजों के लिए थे, जो बिना लक्षण वाले हैं, लेकिन होम आइसोलेशन में नहीं रहना चाहते या होम आइसोलेशन में रहने की व्यवस्था नहीं थी। अब 10 और अस्पतालों जो जोड़े जाने की कवायद चल रही है। इनके जुड़ने से 500 से ज्यादा बेड की व्यवस्था और हो जाएगी। इन पर ऑक्सीजन सप्लाई भी रहेगी।
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जिन अस्पतालों को जोड़ा जाना है, उनके प्रबंधन से स्वास्थ्य विभाग की बात चल रही है। पुराने भी जो अस्पताल जुड़े हैं, वे अभी भी पैनल में शामिल हैं। अधिकांश अस्पतालों में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लग रहे हैं, ताकि ऑक्सीजन की किल्लत न हो। इसके अलावा बच्चों के इलाज के लिए मेरठ में आठ पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) वार्ड बनाए गए हैं।
हर स्तर पर कर रहे तैयारी
हर स्तर पर तैयारी की जा रही है। और निजी अस्पतालों को कोविड अस्पतालों के पैनल में शामिल किया जाएगा। कवायद चल रही है। अस्पतालों में अब सिर्फ पांच मरीज भर्ती हैं। बाकी बेड खाली हैं। अस्पताल वाले उन्हें अन्य मरीजों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अगर कोरोना बढ़ता है तो उन्हें कोविड के लिए आरक्षित कर दिया जाएगा। - डॉ. अखिलेश मोहन, सीएमओ