मेरठ। जम्मू-कश्मीर दशकों से भारत का सबसे अशांत क्षेत्र रहा है। उसकी सुरक्षा में हजारों जवानों ने हर वर्ष अपने प्राणों की आहुति दी है। अब स्थितियां बदल चुकी हैं। वह दिन दूर नहीं जब पीओके शब्द मानचित्र से गायब हो जाएगा। सामरिक रूप से भारत अपने कई पड़ोसी देशों से सीधे तौर पर जुड़ जाएगा। ये विचार लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. नितिन कोहली (रिटायर्ड) ने जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख अध्ययन केंद्र मेरठ चैप्टर एवं रक्षा अध्ययन विभाग मेरठ कॉलेज मेरठ के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय वेबिनार के समापन अवसर पर व्यक्त किए।
मुख्य वक्ता निधि बहुगुणा ने कहा कि जम्मू का कुल क्षेत्रफल 36 हजार 315 वर्ग किमी है। इसके लगभग 13 हजार 297 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर पाकिस्तान का कब्जा है। यह कब्जा उसने 1947-1948 के युद्ध के दौरान किया था। जम्मू के भिंबर, कोटली, मीरपुर, पुंछ, हवेली बाग, सुधांति, मुजफ्फराबाद, हट्टियां और हवेली जिले पाकिस्तान के कब्जे में हैं। पाकिस्तान जम्मू के इसी कब्जा किए गए हिस्से को आजाद कश्मीर कहता है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि वेबिनार के दूसरे दिन के तृतीय सत्र का विषय ‘पाकिस्तान और चीन द्वारा भारत के आधिकरांत क्षेत्रों का महत्व‘ रहा। इस सत्र की अध्यक्षता सीमा जागरण मंच, दिल्ली के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. नितिन कोहली (रिटायर्ड) ने की। चतुर्थ सत्र का विषय जम्मू-कश्मीर के एकीकरण का औचित्य एवं हमारी भूमिका रहा। इसकी अध्यक्षता शोभित विवि के कुलपति प्रो. एपी गर्ग ने की। मुख्य वक्ता जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र, नई दिल्ली के निदेशक आशुतोष भटनागर रहे।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम को सफल बनाने में मेरठ कॉलेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष सचिव डॉ. रामकुमार गुप्ता, प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. युद्धवीर सिंह, डॉ. रवींद्र कुमार, डॉ. दयानंद द्विवेदी, डॉ. बीना राय, प्रो. संजीव कुमार मिश्र, डॉ. मुरारी प्रसाद वर्मा, डॉ. शैलेंद्र प्रसाद गोदियाल, डॉ. अनुराग जायसवाल, डॉ. नीलम कुमारी, डॉ. सुमन का विशेष योगदान रहा।