पिता से सीखे राजनीति के गुर
मनीष चौहान का परिवार पहले ही राजनीति में रहा है। उनके पिता वीरेंद्र सिंह छह बार कांधला विस सीट से विधायक रह चुके हैं। उनकी मजबूत राजनीति के चलते मनीष ने मुजफ्फरनगर के डीएवी कालेज में छात्र राजनीति की। 2010 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए।
इसके बाद शामली अलग जिला बनने के बाद 2013 में वह जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने चुनाव में बसपा के बिजेंद्र मलिक को हराया था। 2015 में भी मनीष चौहान ने जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ा। उन्होंने नाहिद हसन की बहन इकरा हसन को चुनाव हराया। 2017 के विस चुनाव में वह सपा के टिकट पर शामली विस सीट से चुनाव लड़े, लेकिन वह तीसरे स्थान पर रहे। 2019 में लोस चुनाव से पहले उनके पिता और मनीष दोनों भाजपा में शामिल हो गए थे।
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