- भोलेश्वर मंदिर में चल रही कथा में दत्तात्रेय और सुदामा चरित्र का वर्णन किया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नई सड़क शास्त्रीनगर स्थित भोलेश्वर मंदिर में आयोजित महापुराण श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास रामप्रकाश शास्त्री ने भगवान श्री दत्तात्रेय एवं सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री दत्तात्रेय ने अपने जीवन में 24 गुरु बनाए थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा गुरु अनेक हो सकते हैं लेकिन दीक्षा गुरु केवल एक ही होता है। मनुष्य यदि सीखने की भावना रखे तो वह कीड़े मकोड़ों और प्रकृति से भी शिक्षा ग्रहण कर सकता है। भगवान दत्तात्रेय ने सर्प, बालक, कछुए, मकड़ी और कुंवारी कन्या को भी गुरु बनाकर उनसे जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षाएं प्राप्त कीं।
सुदामा प्रसंग पर उन्होंने कहा कि संसार में सच्ची मित्रता का सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता है। धनवान से मित्रता करना आसान है लेकिन जो निर्धन से प्रेम करे वही वास्तव में महान होता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने निर्धन सुदामा को अपने पलकों पर बैठाया और स्वयं उनके चरणों की सेवा की। द्वारकाधीश होने के बावजूद श्रीकृष्ण अपने मित्र के प्रति पूर्ण समर्पित रहे।
कथा में रावण और श्रीकृष्ण के उदाहरण के माध्यम से दान और सद्भाव का महत्व भी बताया गया। उन्होंने कहा कि रावण सोने के महलों में रहने के बावजूद दान नहीं कर सका जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा के लिए दो मुट्ठी चावल ग्रहण कर अपार संपदा प्रदान कर दी। इस दौरान आलोक सिसोदिया ने बताया कि सोमवार सुबह यज्ञ के साथ भागवत कथा का विश्राम होगा। इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। इस अवसर पर अनुज, गोविंद, मुकेश, आलोक सिसोदिया, नितेश, अशोक, राजेंद्र, अनुभा, प्रीती, राधा, मनीष, श्वेता, मधु मित्तल, आलोक सिसोदिया एवं नवीन अरोरा सहित अन्य श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।