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निगम में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे सीएम ग्रिड योजना का टेंडर निरस्त

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मेरठ। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे सीएम ग्रिड योजना का टेंडर नगर निगम को काफी किरकिरी कराने के बाद शुक्रवार को निरस्त करना पड़ा। टेक्निकल बिड के चार मिनट बाद फाइनेंशियल बिड खोलना सहित टेंडर में कई अनियमितता की गई थी। भाजपा के 14 पार्षदों ने निगम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार व अनियमितता का आरोप लगाकर कैंट विधायक अमित अग्रवाल से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत की। भाजपा महानगर अध्यक्ष ने कोर कमेटी के साथ सर्किट हाउस में बैठक की थी, जिसमें सीएम ग्रिड योजना में भ्रष्टाचार का मामला भी गर्माया। काफी जद्दोजेहद के बाद निगम ने 70 करोड़ के तीनों टेंडर निरस्त कर दिए।
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सीएम ग्रिड योजना के द्वितीय चरण में गढ़ रोड से रंगोली मंडप होते हुए हापुड़ रोड, कमिश्नरी चौराहे से बच्चा पार्क, कमिश्नर आवास चौराहे से सर्किट हाउस तक करीब 70 करोड़ की लागत से निगम सड़क निर्माण कराएगा। तीनों सड़क निर्माण का टेंडर एक ही ठेकेदार की तीन अलग-अलग कंपनी ने ले दिया। भाजपा पार्षदों का आरोप कि टेंडर प्रक्रिया को पुल कराया गया है। इसको लेकर पार्षदों ने नगर निगम, कमिश्नरी, कैंट विधायक और फिर मुख्यमंत्री तक शिकायत की। पार्टी के ही पार्षदों ने द्वारा निगम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने का मामला तूल पकड़ गया।
बुधवार को सर्किट हाउस में महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी की अध्यक्षता में राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई, राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर, कैंट विधायक अमित अग्रवाल और महापौर हरिकांत अहलूवालिया सहित भाजपा नेताओं की बैठक हुई।
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टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अनियमितता को लेकर बैठक में दो भाजपा नेताओं के बीच तीखी बहस भी हुई। मामला हाईकमान तक पहुंचा गया। टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता की जांच करने के लिए निगम अधिकारियों में शुक्रवार को मंथन हुआ। नियमों के विरुद्ध चार मिनट बाद फाइनेन्सियल बिड खोलने और टेंडर प्रक्रिया से बाहर होने वाली कंपनी को 72 घंटे का समय न देना सहित कई अनियमितता होना पाया गया। काफी जिद्दोजेहद के बाद नगर निगम ने तीनों सड़कों के टेंडर को निरस्त कर दिया। अब तीनों सड़कों का री-टेंडर होगा। इस बार री-टेंडर में निर्माण विभाग, यूरिडा, पीडब्ल्यूडी के साथ अन्य फाइनेंस विभाग से भी रिपोर्ट मांगी जाएगी है। निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ री-टेंडर की प्रक्रिया अपनाने का नगर निगम के अधिकारी दावा करने की बात कह रहे हैं।

इन पार्षदों ने उठाया था मामला
भाजपा के पार्षद अनुज वशिष्ठ, अजय चंद्रा, अनिल वर्मा, पूनम गुप्ता, अनुराधा गुलाठी, संदीप रेवड़ी, कुलदीप वाल्मीकि, संजय सैनी, पवन चौधरी सहित 14 पार्षदों ने सीएम ग्रिड योजना में भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप लगाकर अधिकारियों से शिकायत की थी। नगर निगम के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। महापौर हरिकांत अहलूवालिया व नगर आयुक्त सौरभ गंगवार बार-बार टेंडर की प्रक्रिया में भाजपा पार्षदों द्वारा लगाए अनियमितता के आरोपों को खारिज कर रहे थे। इस प्रकरण को लेकर अमर उजाला समाचार प्रकाशित कर रहा था। इस पर निगम ने पहले टेंडर को होल्ड किया और अब निरस्त किया गया।

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सीएम ग्रिड योजना में भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लगातार पार्षदों द्वारा लगाए जा रहे थे। जिसके चलते तीन दिन पहले ही तीनों सड़कों के टेंडर निरस्त करने के निर्देश नगर निगम को दे दिए थे। री-टेंडर पारदर्शिता और निष्पक्षता से कराया जाएगा। किसी भी अधिकारी की लापरवाही मिली तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी करूंगा।
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हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
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