दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित शिवकथा में कथा सुनते श्रद्धालु।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से गढ़ रोड स्थित बुद्धा गार्डन में बुधवार से सात दिवसीय शिवकथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस से पूर्व 31 वेद पाठियों द्वारा रुद्री पाठ का सामूहिक एवं शुद्ध उच्चारण किया गया। ऐसे में पूरा वातावरण दिव्यता, ऊर्जा और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत हो उठा।
कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर ने कथा माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा आध्यात्मिकता में निहित है। वेद, पुराण और उपनिषद जैसे आर्ष ग्रंथों ने सदैव मानव जीवन को दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि वैराग्य, योग, भक्ति और शक्ति के अद्वितीय संगम हैं। उन्होंने बताया कि त्रेतायुग में भगवान शिव ने ही रुद्रावतार के रूप में हनुमान जी का अवतार लेकर रामभक्ति का अनुपम आदर्श प्रस्तुत किया।
आज समाज में निष्काम भक्ति और सकारात्मक शक्ति का अभाव दिखाई देता है, जिसके कारण वैमनस्य, हिंसा और विभाजन जैसी कुरीतियां बढ़ रही हैं। डॉ. सर्वेश्वर ने कहा कि हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आरंभ हुई यह शिवकथा ब्रह्मज्ञान के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति के भीतर शिव तत्व को जागृत करने का संदेश देती है। “सत्यं शिवं सुंदरम्” के मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। मंच पर संस्थान के संगीतकार शिष्यों ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर सभी को शिव भक्ति में भावविभोर कर दिया। भोलेनाथ का सुसज्जित दरबार और मनोहारी झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।