माछरा। श्रीराम लीला कमेटी के मंच पर कलाकारों ने राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और सीता जन्म की रामलीला का मंचन किया गया। राम के जन्म होते ही रामलीला मैदान श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
भगवान श्रीराम के जन्म की लीला का मंचन मंत्रमुग्ध करने वाला रहा। राजा दशरथ गुरु वशिष्ठ के आश्रम में जाते हैं। गुरुदेव दशरथ के आने का कारण पूछते हैं। दशरथ कहते हैं कि उनके कोई संतान नहीं है। इस पर गुरुदेव संतान उत्पत्ति के लिए यज्ञ कराते हैं। यज्ञ से अग्नि देव प्रकट होते हैं। अगले दृश्य में भगवान विष्णु प्रकट होते हैं। कौशल्या उनके दर्शन करती हैं। उधर राजा जनक के यहां सूखा पड़ता है। जनक खेत में सोने का हल चलाते हैं। जमीन से कन्या मिलती है। उसका नाम सीता रखा जाता है। रामलीला की व्यवस्था बनाने में दिनेश त्यागी, प्रधान राकेश त्यागी, सुखवीर त्यागी, बोबी त्यागी, संजय सैन, जब्बर सैनी, अनिल शर्मा, बिजेंद्र शर्मा, विनोद, जोशिल, लोमश, कल्लू सैनी, ताराचंद त्यागी, विनोद भाटी आदि रहे।