मेरठ। हाथ में कैमरा, सामान्य युवाओं से हटकर हुलिया... सिगरेट की सुलगती राख से पीली हो चुकी हथेलियां। आज से 35 बरस पहले यह हालत किसी छायाकार की कहानी बयां करते थे। यादों को संजोने के लिए उनकी खींची तस्वीर लोगों के लिए मायने रखती थी। तब शहर में चुनिंदा फोटोग्राफर होते थे, लेकिन अब पूरा घर हाथ में कैमरा लिए घूमता है। मोबाइल में इनबिल्ड कैमरे ने हर किसी को फोटोग्राफर बना दिया है।
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर शहर में तस्वीरबाजी के इतिहास के फोटो पलटें तो 50 बरस पहले श्वेत-श्याम तस्वीरें सामने दिखेंगी। तब चुनिंदा फोटो स्टूडियो होते थे। आजादी के बाद रोल, रील के बाद मेमोरी कार्ड में तस्वीरें सुरक्षित होने लगी। छोटे से आयोजन से लेकर दिनभर की हर याद और घटना को लोग कैमरे में कैद करना चाहते हैं। आज युवा जरूरत और शौकिया ही नहीं, बल्कि करियर बनाने के लिए कैमरा थामे हुए हैं। फोटोग्राफी का शौक लड़कियों को भी खूब भा रहा है।
फोटोग्राफी दिवस का यह है इतिहास
देश में 16वीं सदी में फोटोग्राफी की शुरूआत मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज से 180 साल पहले 9 जनवरी 1839 को फोटोग्राफी की शुरूआत हुई थी। 19 अगस्त 1839 को फ्रांस की सरकार ने इसकी घोषणा की थी। इसी की याद में दुनिया में हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है।
आज हर घर में मौजूद है छायाकार
विरासत में मिली अपनी जिम्मेदारियों एवं खूबियों को बरकरार रखना आसान नहीं होता, उस जिम्मेदारी एवं खूबी को बनाए रखने के लिए समय-समय पर आने वाली नवीन तकनीकों को भी अपनाना पड़ता हैं, ताकि अपने कस्टमर्स को वहीं पुरानी बेहतर सुविधा का अनुभव कराया जा सकें। मेरठ कैंट स्थित गोयल फ़ोटो सर्विस के संचालक नितिन गोयल का कहना है कि आज हर घर में छायाकार मौजूद है। मगर चार पीढ़ियों से चला आ रहा गोयल फोटो स्टूडियो दुनिया के सबसे पुराने वर्तमान में संचालित फ़ोटोग्राफ़ी स्टूडियों में एक है। इसकी स्थापना 1928 में मेरठ के प्रतिष्ठित गोयल परिवार के लाला ज्योति प्रसाद गोयल द्वारा की गई थी जो देखते ही देखते स्टूडीयो, आउट्डोर, आर्मी, प्रशासनिक फ़ोटोग्राफ़ी व फ़ोटो प्रिंटिंग में एक बड़ा नाम बन गया। दशक 1960 में दुर्लभ सर्किट कैमरे द्वारा आर्मी व वीवीआइपी ग्रुप फ़ोटोग्राफ़ी होती थी, जिसमें 6 फ़ीट के सिंगल निगेटिव से पेनोरामिक फ़ोटो तैयार किए जाते थे। यह कैमरा आज भी स्पेशल डिमांड पर देखा जा सकता है।
दशक 1970 में पहली बार इंस्टेंट पासपोर्ट फ़ोटो की सुविधा भी गोयल फ़ोटो सर्विस की तीसरी पीढ़ी राजीव लोचन गोयल द्वारा ही उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने 1990 के दशक में पहली बार डिजिटल फ़ोटोग्राफ़ी की सर्विसेज़ शहर के नागरिकों तक पहुंचानी शुरू कर दीं। नितिन गोयल द्वारा एक्स्पोज़र स्कूल ओफ़ फ़ोटोग्राफ़ी नाम से एक फ़ोटोग्राफ़ी स्कूल की स्थापना की गई हैं जहां उन्होंने युवाओं को फ़ोटोग्राफ़ी की बारिकियों से रूबरू कराते हुए फोटोग्राफी की कला को घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है।