- आर्य समाज थापरनगर में हुआ सत्संग का आयोजन
माई सिटी रिपोटर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में वैदिक शिक्षा पद्धति पर विचार व्यक्त करते हुए प्रधान राजेश सेठी ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल जीविका उपार्जन के लिए तैयार करना रह गया है। इसके विपरीत वैदिक शिक्षा पद्धति का लक्ष्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। इससे वह समाज की उन्नति, राष्ट्र की रक्षा तथा पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन के योग्य बन सके।
वैदिक काल में गुरुकुलों में प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में बालक गुरु के सानिध्य में शिक्षा प्राप्त करता था। उसके मानसिक, शारीरिक एवं बौद्धिक विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध थीं। आचार्य बालक को माता समान स्नेह देकर उसका समग्र विकास करते थे। वहीं ब्रह्मचारी भी सांसारिक उलझनों से दूर रहकर पूर्ण समर्पण के साथ शिक्षा ग्रहण करता था। इससे एक आदर्श चरित्रवान युवा का निर्माण होता था।
उन्होंने वैदिक शिक्षा पद्धति के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रीति सेठी, ऋचा सेठी, कमलेश चांदना, विमल मरवाह, धर्मवीर, सुमन आनंद एवं विदुला सोनी ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के सान्निध्य में देवयज्ञ संपन्न हुआ। जयजमान राकेश ओबराय रहे। इस अवसर पर चांद ग्रोवर, सुनीता, अजय प्रेमी, मुकेश कन्नोजिया, विजय बंसल, करुणासागर बाली, आनंद वर्धन झा, आशीष सेठी रहे।