जानी क्षेत्र में सामूहिक विवाह योजना के लिए किया था आवेदन, पीड़ित ने डीएम से की थी शिकायत
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जानी ब्लॉक में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। इटारा गांव निवासी उमेश कुमार ने अपनी पुत्री के विवाह के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि रिश्वत न देने के कारण उसका विवाह योजना के तहत लाभ नहीं दिया गया और आवेदन निरस्त कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने इस मामले में डीएम से न्याय की गुहार लगाई है। डीएम डॉ. वीके सिंह ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इटारा निवासी उमेश कुमार ने अपनी 22 वर्षीय पुत्री अनमोल के विवाह हेतु मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में आवेदन किया था। योजना के तहत आठ फरवरी 2026 को जानी ब्लॉक में सामूहिक विवाह की प्रक्रिया संपन्न हुई थी। पीड़ित परिवार ने पुत्री के विवाह के लिए आर्थिक सहायता और कार्ड 12 मार्च 2026 को जारी कर दिया था। आरोप कि आवश्यक औपचारिकता पूरी होने के बाद भी अंतिम समय में अधिकारियों ने रिश्वत मांगी हैं। आरोप है कि जानी ब्लॉक में तैनात एडीओ पंचायत अनिल कुमार और बीएलओ अलका तोमर ने इस विवाह के लिए 15 हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि रिश्वत की रकम न मिलने पर अधिकारियों ने आर्थिक सहायता रोकने और सूची से नाम हटाने की धमकी दी। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बेटी पूरे दिन कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रही, लेकिन उसे कोई सहायता नहीं दी गई और बाद में उसका विवाह आवेदन निरस्त कर दिया गया।इस घटना से बेटी मानसिक तनाव में है और पूरा परिवार सदमे में है। उमेश मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, और जिनकी पत्नी दिव्यांग हैं।