राज्यसभा में गूंजा पश्चिमी यूपी के जल प्रदूषण का मुद्दा
मेरठ। राज्यसभा में बृहस्पतिवार को पश्चिमी यूपी के जल प्रदूषण का मुद्दा गूंजा। भाजपा के राज्यसभा सांसद ठाकुर विजयपाल सिंह तोमर ने सदन में शून्यकाल की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा कोई जल स्रोत नहीं बचा है जो प्रदूषित न हो। देश का 80 फीसदी जल प्रदूषित हो चुका है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों से बिना ट्रीटमेंट जल प्रवाहित किया जा रहा है। पश्चिमी यूपी और खासकर एनसीआर में जो उद्योग हैं जैसे चीनी मिल, डिस्टलरी, पेपर मिल, पशु वधशाला एवं केमिकल इंडस्ट्री आदि से निकलने वाला दूषित पानी नदी-नालों में बहाने के साथ ही री-बोर करके जमीन में उतार दिया जाता है। उद्यमियों की कारगुजारियों से काली नदी, गंगा, यमुना, हिंडन आदि प्रदूषित हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा 1991 में ऐसा ही विषय उत्तर प्रदेश विधानसभा में उठाया गया था। उस समय दौराला शुगर मिल की डिस्टलरी प्रदूषित पानी बिना ट्रीटमेंट के बहा रही थी। शुगर मिल ने जब तक इसे रोका तब तक दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी। ऐसा ही मामला 2015-16 में नंगलामल शुगर मिल डिस्टलरी का सामने आया था। यहां भी करीब दो दर्जन लोग प्रदूषित जल का शिकार हुए थे। अभी भी काफी लोग किडनी, चर्म रोग, लीवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्होंने सदन से आग्रह करते हुए कहा कि इन मामलों पर सख्त कार्यवाही करते हुए एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उद्योगों की मॉनिटरिंग के साथ वाटर ट्रीटमेंट कराना सुनिश्चित करें।