मेरठ/हस्तिनापुर। एक तरफ केंद्र सरकार ने बजट में हस्तिनापुर में राष्ट्रीय संग्रहालय बनाने की घोषणा कर लोगों को राहत दी। वहीं, रेलवे द्वारा जारी पिंक बुक में मेरठ-हस्तिनापुर रेल लाइन को बाहर कर दिया गया है। जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही मूर्तिकार भी निराश है।
ऐतिहासिक नगरी में पाषाण से मूर्ति बनाने का कार्य है। यह कला भी अब विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। इस कला से संबंध रखने वाले लोगों के सामने रोटी रोजी का भी संकट गहरा रहा है। वहीं, महाभारतकालीन नगरी हस्तिनापुर के इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने में लगे नेचुरल साइंस ट्रस्ट के चेयरमैन प्रियंक भारती ने भी रेल लाइन न मिलने पर निराशा जताई है। उन्होंने मूर्तिकारों की समस्या को उठाते हुए रेल लाइन के लिए प्रधानमंत्री और रेलमंत्री को ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है कि रेल लाइन के होने से यहां के मूर्तिकारों की कला को बढ़ावा मिलेगा।
कला से लिया सन्यास
मैं मूर्तिकार वासुदेव पाल हूं। उम्र करीब 70 साल है। अपने समय में एक से बढ़कर एक मूर्तियां बनाई। मुझे सम्मानित भी किया गया। लेकिन न तो इस कला का सम्मान हुआ और न ही इसके लिए मनमाफिक क्षेत्र मिला कस्बे को रेलवे लाइन से नहीं जोड़ने से रोजी-रोटी का संकट गहरा गया। अब मैंने मूर्ति बनाने की कला से संन्यास ले लिया है
रोजी रोटी के अवसर बढ़ते
40 साल के मूर्तिकार दुर्गेश नंदिनी दास का कहना है कि इस कला में लगभग 15 वर्ष की उम्र से ही कार्य कर रहा हूं। यह हमारा पुश्तैनी काम है। रेलवे लाइन की सौगात मिलने से यहां से देश-विदेश में मूर्ति की सप्लाई करना आसान हो जाता। रोजी-रोटी के भी अवसर बढ़ते।
विकास को लगेगा ग्रहण
जंबूद्वीप तीर्थ क्षेत्र प्रबंधन कमेटी के मंत्री विजय कुमार जैन का कहना है कि ऐतिहासिक नगरी में बजट पेश होने के बाद लोगों में खुशी की लहर थी। पर्यटकों के आने-जाने की संभावना बढ़ गई थी। लेकिन ऐतिहासिक नगरी में रेलवे लाइन न आने से यहां के विकास को फिर ग्रहण लगेगा। पर्यटकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
पुराना रवैया नजर आ रहा
श्वेतांबर जैन मंदिर के प्रबंधक तेजपाल सिंह का कहना है कि ऐतिहासिक नगरी में रेलवे लाइन की सौगात बहुत जरूरी है। समय के साथ सरकार बदली। लेकिन सभी का वही रवैया अभी तक नजर आ रहा है। किसी ने भी ऐतिहासिक नगरी के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। रेलवे को भी सोचना होगा कि ऐतिहासिक नगरी में रेल लाइन की विशेष दरकार है।