सरधना (मेरठ)। सम्पूर्ण समाधान दिवस में दुष्कर्म के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करने पहुंचे परिवार ने फिर से जांच का आश्वासन मिलने पर आत्मघाती कदम उठा लिया और तहसील सभागार के गेट पर एसएसपी के सामने ही दुष्कर्म पीड़िता, उसकी मां और बहन ने डीजल छिड़कर आत्मदाह का प्रयास किया। आनन-फानन में पुलिस ने उनके हाथों से डीजल की बोतल छीन ली। पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को समझा-बुझाकर कार्रवाई की बात कही।
शनिवार को सरूरपुर थाना क्षेत्र के गांव निवासी नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता परिजनों के साथ संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंची। पीड़िता ने जिलाधिकारी के नाम प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि गांव के ही युवक ने छह माह पूर्व उससे दुष्कर्म किया था। उसी समय आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार देर रात दुष्कर्म के आरोपी आधा दर्जन लोगों को लेकर घर में घुस आए और मुकदमा वापस नहीं लेने पर फिर से दुष्कर्म करने की धमकी देते हुए उसके साथ मारपीट कर दी। शोर सुनकर आसपास के लोगों को आता देख आरोपी धमकी देते हुए फरार हो गए।
इस दोरान एसएसपी ने जैसे ही जांच का आदेश क्षेत्राधिकारी को दिया तो दुष्कर्म पीड़िता, उसकी मां और बहन ने अपने ऊपर डीजल छिड़क लिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने मशक्कत के बाद उनसे डीजल की बोतल छीन ली। पीड़िता और उसके परिजनों ने आरोप लगाया कि थाना पुलिस आरोपियों से साठगांठ करते हुए कार्रवाई नहीं कर रही है। छह माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर आरोपियों के हौंसले बुलंद हैं और वे मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि अधिकारियों ने जांचकर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हंगामे के बीच एसडीएम पंकज प्रकाश राठौर ने समझाते हुए पीड़ित पक्ष को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत किया। बाद में पीड़ित पक्ष को सरधना थाने ले जाकर सीओ नितिन तनेजा, प्रभारी निरीक्षक रमाकांत पचौरी ने पूरी समस्या सुनी।
मौजूद नहीं थी कोई महिला पुलिसकर्मी
सरधना। संपूर्ण समाधान दिवस के मौके पर दुष्कर्म पीड़िता और उसकी मां व बहन ने पुलिस की लापरवाही से क्षुब्ध होकर डीजल छिड़ककर अधिकारियों के सामने आत्मदाह करने का प्रयास किया लेकिन अपने ऊपर डीजल की बोतल उड़ेलते समय किसी ने बोतल छीनने का प्रयास नहीं किया। महिला पुलिसकर्मी नहीं होने कारण सभी किशोरी को पकड़ने से बचते रहे। यदि मौके पर महिला पुलिसकर्मी तैनात होती तो घटना को रोका जा सकता था। पुलिस अधिकारियों ने महिला पुलिसकर्मी के गैरहाजिर होने पर नाराजगी जताते हुए सख्त हिदायत दी।
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पुलिस की कार्यप्रणाली से तंग था परिवार
सरधना। सरूरपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक दलित किशोरी के साथ 6 माह पूर्व हथियारों के बल पर दुष्कर्म करने, परिवार को जान से मारने की धमकी और जाति सूचक शब्द कहने की शिकायत की गई थी। मामले में गांव के ही दो सगे भाइयों संजू, नीरज व उनके पिता सतबीर, लखन, नीरज, गोविंद, अंकित, परवेज, शुएब, अंकित अर्जुन व शिवम आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सीओ सरधना शिव प्रताप सिंह की जांच में सामने आया था कि आरोपी घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने जांच के बाद एफआर लगा दी थी। हालांकि इस मामले में गांव के खुद को योगी सेवक और मुख्यमंत्री के करीबी बताने वाले भाजपा नेता ने आरोपियों के पक्ष में सिफारिश की थी। वहीं, पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी थी यदि जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वह आत्महत्या कर लेंगे। संवाद