साइड खबर...
- कानूनगो की गिरफ्तारी होते ही सदर तहसील में मची खलबली
- हंगामा होने से पहले ही एंटी करप्शन टीम कानूनगो थाने ले गई
- निलंबन की होगी कार्रवाई, विभागीय जांच शुरू
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सदर तहसील में भ्रष्टाचार की जड़ कितनी गहरी है, इसका ताजा उदाहरण बुधवार दोपहर देखने को मिला। 20 दिन पहले सहारनपुर से तबादला होकर मेरठ सदर तहसील में कानूनगो धर्मपाल सिंह खुलेआम रिश्वत मांग रहे थे। इसकी शिकायत होने पर एंटी करप्शन टीम ने तहसील में अपना जाल बिछाया और रिश्वत लेते कानूनगो को रंगेहाथ दबोच लिया। इससे पहले वहां लोगों की भीड़ लगती कि एंटी करप्शन टीम कानूनगो को लेकर थाने पहुंच गई।
गढ़ रोड स्थित आलमपुर बुजुर्ग गांव निवासी दल सिंह की भूमि का खसरा संख्या के साथ मिंजुला (एक नंबर के कई खाता होना) लिखा था। नियमानुसार इसकी डोल बंदी नहीं हो सकती थी। इसके बावजूद कानूनगो डोल बंदी कराने की बात कहकर किसान दल सिंह से रिश्वत मांग रहे थे। रिश्वत के रुपये कम लेने को सौदेबाजी तक हुई। कानूनगो की शिकायत एंटी करप्शन में की गई। उन्होंने तुरंत लिखापढ़ी की। दल सिंह को तहसील में कमरा नंबर-18 में कानूनगो के पास भेज दिया। कानूनगो ने रिश्वत का लिफाफा जैसे ही थमा, तभी एंटी करप्शन की टीम ने उनको दबोच लिया। एंटी करप्शन की टीम द्वारा कानूनगो को पकड़ने की सूचना तहसील में फैल गई।
तहसील के कर्मचारी और अधिकारी मौके पर पहुंचे, तब तक टीम कानूनगो को देहलीगेट थाने ले गई। एंटी करप्शन की तहरीर पर पुलिस ने कानूनगो पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। रिश्वत का पैसा जमा हो गया है। एंटी करप्शन ने अपनी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी की है। इसको वह चार्जशीट के साथ कोर्ट में दाखिल करेंगे। कानूनगो धर्मपाल सिंह मूलरूप से मवाना तहसील के पहाड़पुर गांव के निवासी है। कानूनगो का तबादला सहारनपुर से मेरठ 20 दिन पहले ही हुआ था।एसडीएम सदर राहुल द्विवेदी का कहना है कि इस मामले में कानूनगो के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करा दी है। उनको निलंबित भी किया जाएगा।
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