पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, आगरा और अलीगढ़ मंडल के 26 जिलों में से कई में जाट मतदाताओं की संख्या 17 फीसदी तक है। जाट मतदाताओं का असर तो करीब 100 सीटों पर है, लेकिन 30-40 सीटें ऐसी हैं, जहां जाट मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। यूं तो जाट हर चुनाव के पहले लामबंद होते रहे हैं, पर अबकी बार किसान आंदोलन के असर की वजह से उनकी लामबंदी और पुख्ता है। किसान आंदोलन से सियासत तक पश्चिम के जाटों की बड़ी भूमिका रही है। गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन के वक्त राकेश टिकैत के आंसू निकले तो नजदीकी मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और आगरा मंडल के किसानों ने ही रातों-रात कूच कर आंदोलन को ताकत दी थी। इनमें बड़ी संख्या जाटों की ही थी।
गिले-शिकवे दूर करने की भी हुईं कोशिशें
गृह मंत्री अमित शाह ने 26 जनवरी को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. साहब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा के आवास पर हुई पंचायत में 250 से ज्यादा जाट नेताओं के साथ मुलाकात कर गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश की। हालांकि, जाट नेताओं ने लगे हाथ शाह को केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण के लिए 2017 और 2019 में भाजपा के किए वादे याद दिला दिए।
सबको याद आ रहे चौधरी चरण सिंह और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाति धर्म से परे चौधरी चरण सिंह की एक बड़ी जगह है। चौधरी साहब यहां आज भी किसानों के दिलों में बसते हैं। चाहे पीएम मोदी हों या फिर सीएम योगी। मायावती हों या अखिलेश और जयंत...। इसीलिए सबका संबोधन चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर ही होता है। किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को भी हर दल का नेता याद कर रहा है।
खापों की भी अहम भूमिका
जाट मतदाताओं पर खाप पंचायतों का भी खासा असर है। खापों ने ही यहां किसान आंदोलन को खाद-पानी दिया। यहां सबसे बड़ी बालियान खाप है। इस खाप के 84 गांव हैं। इस खाप के चौधरी नरेश टिकैत हैं, जो राकेश टिकैत के भाई हैं। बागपत की 84 देशखाप, गठवाला खाप, चौगामा खाप, बत्तीसा खाप, देशवाल खाप, लाटियान खाप, अहलावत खाप, बत्तीस खाप, कालखंडे खाप भी खासा असर रखती हैं। खाप चौधरी सामाजिक मसलों के इर्द-गिर्द बड़ी पंचायतें करते रहे हैं। आंदोलन कर रहे किसानों को खाने-पीने के सामान से लेकर आर्थिक मदद तक में खापों ने बड़ी भूमिका निभाई है।
कांग्रेस और बसपा ने भी लगाया जाटों पर दांव
कांग्रेस और बसपा ने भी मैदान में जाट प्रत्याशी उतारे हैं। कांग्रेस ने बिलारी से कल्पना, मेरठ कैंट से अवनीश काजला, अनूपशहर से चौधरी गजेंद्र, मांट से सुमन चौधरी, जलालाबाद से गुरमीत सिंह, गोवर्धन से दीपक चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। बसपा ने भी शामली से विजेंद्र मलिक, सरधना से संजीव धामा, बिलारी से अनिल चौधरी, अतरौली से डॉ. ओमबीर सिंह पर दांव लगाया है।
सपा-रालोद गठबंधन के ये 16 जाट उम्मीदवार ( सीट और प्रत्याशी)
भाजपा ने उतारे 17 जाट प्रत्याशी
जाट चाहते हैं प्रदेश और केंद्र में हिस्सेदारी
जाटों ने मुगलों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। पिछले तीन चुनावों में भाजपा को खूब वोट भी दिया। हाईवे, एक्सप्रेसवे भी बने और काम भी हुआ, पर जाटों को न तो प्रदेश में और न ही केंद्र में उतनी भागीदारी मिली, जितने के वे हकदार थे। हमने दिल्ली में अमित शाह के साथ हुई बैठक में भी यह बात रखी है। हमारी बात सुनी गई है और इस पर अमल का भरोसा भी दिया गया है। हिस्सेदारी मिलेगी तो जाट समाज का मन बदलेगा।
-चौधरी विक्रम राणा, जाट नेता बागपत
कमजोर नहीं है याददाश्त
न आरक्षण मिला और न इसके लिए कमेटी का गठन हुआ। हरियाणा में किसान आंदोलन में समाज के बेटों पर गोलियां चलाई गईं। हाथरस में दलित बेटी के लिए इंसाफ की मांग कर रहे नेताओं पर लाठीचार्ज किया गया। तीन कानूनों के खिलाफ आंदोलित 700 से ज्यादा किसानों की मौत हुई। लखीमपुर में जो कांड हुआ, उस सबको जाट भूलेगा नहीं।