शामली। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव ने एक बार फिर रिश्तों की गांठ खोल दी है। न चाहते हुए रिश्तेदारों के बीच सरहद की दीवार खड़ी हो गई है। एक-दूसरे मुल्क में न रहने की मजबूरी उनकी जुदाई की वजह बनी। अब भारत में रह रहे परिवारों को पाकिस्तान गए अपनों की चिंता सता रही है। उन्हें डर है कि कहीं आतंक की आग में उनके रिश्ते न झुलस जाएं।
जिले के शामली, कैराना, कांधला के 100 से अधिक मुस्लिम परिवारों की रिश्तेदारियां पाकिस्तान के लाहौर, गुजरावाला शहर में है। भारत-पाक सीमा पर तनाव के बाद जिले के लोगों के डर सता रहा है कि पाकिस्तान में उनके निर्दोष रिश्तेदार कहीं काल के गाल में समा जाए। भारत पाक के बीच चल रहे तनाव के मद्देनजर कैराना और कांधला के उन परिवार के सदस्यों से बात की गई जिनकी रिश्तेदारियां पाकिस्तान में है। उन्होंने कुछ यूं कहां....
आतंकियों पर शिकंजा कसे, मगर दोनों मुल्कों में प्रेम हो
कस्बे के मोहल्ला शेखजादगान निवासी रिजवान रहमानी ने बताया कि उसकी मौसी की शादी वर्ष 1995 में लाहौर से 80 किलोमीटर दूर गुजरावाला शहर में हुई थी। उनकी बेटी सिदरा से उसने 14 सितम्बर वर्ष 2023 को पाकिस्तान जाकर शादी की। शादी के बाद 40 दिन के वीजा पर सिदरा कांधला आई थी मगर बाद में लौट गई। कहा कि पत्नी पाकिस्तान में ही रह रही है। हर रोज उससे फोन पर बात होती है। उसने बताया कि पाकिस्तान में अभी सब कुछ सामान्य है। आतंकियों पर लगाम लगे, ताकि आम लोग काल के गाल में नहीं समाएं। दोनों मुल्कों में प्रेम होना चाहिए।
- पता नहीं, अब मिलना होगा या नहीं
कांधला के मोहल्ला खैल निवासी वाजिद ने बताया कि पाकिस्तान के मुल्तान शहर में अपनी फूफी की बेटी सायराबानो से उसका कई वर्ष पहले निकाह हुआ था। पहलगाम हमले से कुछ दिन पहले ही पत्नी भारत आई थी। हमले के बाद सरकार के आदेश के बाद वापस पाकिस्तान लौट गई। अब युद्ध के हालातों से डर सता रहा है कि कब दोबारा मिलना होगा। सभी को एक दूसरे के इन हालातों में फिक्र है। अल्लाहताला से यही दुआ करते हैं कि युद्ध शांत हो और आम लोगों का कोई नुकसान नहीं हो।
- आतंकवाद छोड़कर इंसानियत की राह पर चलना चाहिए
कैराना के खुरगान रोड निकट चांद मस्जिद निवासी सलीम की शादी 27 साल पहले पाकिस्तान के लाहौर की गुलाम फातिमा के साथ हुई थी। 2018 में गुलाम फातिमा को भारत की नागरिकता मिल गई थी। गुलाम फातिमा ने बताया कि उसका एक भाई उस्मान पाकिस्तान के लाहौर में रहता है। दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है। उसे अपने भाई भतीजे की सलामती का डर तो सता रहा है लेकिन साथ ही दुआ करती हूं कि पाकिस्तान आतंकवाद छोड़कर इंसानियत की राह पर चले इसी में दोनों देशों की भलाई है। उसने अपने भाई से फोन पर बात भी नहीं की है।
- मायके वालों का डर सता रहा है
कैराना मोहल्ला इकरामपुरा में रहने वाले तौसीक की शादी 40 साल पहले पाकिस्तान के जिला झंग निवासी फातमा के साथ हुई थी। फातमा ने बताया कि दोनों देशों के बीच युद्ध नहीं होना चाहिए इससे बेकसूर लोग मरते हैं। उन्हें अपने मायके के लोगों की सलामती का डर बना हुआ है। उसने करीब 2 महीने पहले पाकिस्तान फोन किया था ,लेकिन बात नहीं हुई है।
- बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए थे जिले के लोग
वर्ष 1947 में देश के बंटवारे के दौरान जिले के काफी संख्या में लोग पाकिस्तान के लाहौर और अन्य शहरों में चले गए थे। जिले के सौ से अधिक लोगों की रिश्तेदारियां पाकिस्तान में हैं।
कैराना में 90 के दशक में गठरी व्यवसाय अपने चरम पर था। कैराना के लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में होने के कारण यहां के लोग पाकिस्तान आते-जाते रहते थे। शुरू में लोग मुनाफा कमाने के लिए यहां से पान सुपारी ले जाते थे तथा पाक से डिस्को नामक कपड़ा व मिर्जा चप्पल लेकर आते थे। लालच बढ़ा तो सोने की तस्करी होने लगी थी। बाद में शिकंजा कसने पर तस्करी पूरी तरह से बंद कर दी गई । अब जिले के लोग पाकिस्तान व्यापार नहीं करते। पाकिस्तान रिश्तेदारियों में यहां के लोगों का आना जाना लगा रहता है।