शामली। बेसिक शिक्षा विभाग की कुछ शिक्षिका स्कूलों में अपने नवाचारों से शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बना रहे हैं। उनके पढ़ाने के तरीके व शिक्षाप्रद वीडियो को जिला स्तर पर काफी पसंद किया जा रहा है। ऐसे में वे दूसरी शिक्षिकाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। शिक्षिका पूनम तोमर डिजिटल वॉल लाइब्रेरी और नीरू नैन नवीन शिक्षण पद्धति से बच्चों को शिक्षण कार्य कराकर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ा रही हैं।
- बच्चे दीवार पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके करते हैं पढ़ाई
प्राथमिक विद्यालय मखमूलपुर नंबर दो की शिक्षिका पूनम तोमर के द्वारा विद्यालय में आईसीटी का प्रयोग करते हुए एक शैक्षिक नवाचार के द्वारा डिजिटल वॉल का निर्माण किया। वाॅल पर विद्यार्थियों को सभी विषयों के वीडियो आधारित विस्तृत समझ के साथ समस्त पाठ सम्मिलित क्यूआर कोड का निर्माण किया। जिनकी मदद से क्यूआर कोड डिजिटल वॉल तैयार की। जहां विद्यार्थी स्वयं विद्यालय में उपलब्ध टैबलेट की मदद से या फोन की मदद से विद्यालय में उपलब्ध स्मार्ट कक्षाओं का संचालन कर सकते हैं।
क्यूआर कोड लाइब्रेरी को अधिक आकर्षक और मनोरंजक बनाया गया। कक्षा में कराए गए कार्य को दोहराने के लिए वीडियो की सहायता से दीक्षा का प्रयोग करते हुए क्यूआर कोड के माध्यम से सभी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई गई क्यूआर पॉकेट स्कैन कर रिवीजन कार्य और शिक्षण कार्य कर सकते हैं। इस माध्यम से बच्चों को सीखने में रुचि बढ़ रही है और संबंधित पाठ की समझ को और पुख्ता होने में बच्चों की मदद हो रही है।
रुचिपूर्ण ढंग से सीखने की इस प्रक्रिया में विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं नामांकन में भी सकारात्मक प्रभाव देखे गए। शिक्षिका पूनम तोमर द्वारा कक्षा पांच तक के सभी पाठ की वीडियो बनाई गई है। जिन वीडियो को सर्च करने के लिए विषय एवं पाठ के नाम के साथ क्यूआर कोड तैयार किया है। जिससे विद्यार्थी संबंधित विषय और संबंधित पाठ को आसानी से ढूंढ़ सकें। शिक्षिका का कहना है कि छात्रों को सुविधाएं उपलब्ध कराना ही उद्देश्य है। नवाचार को पसंद भी किया जा रहा है।
- सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई से वंचित नहीं रहेंगे बच्चे
प्राथमिक विद्यालय नाला नंबर दो की नवाचारी शिक्षिका नीरू नैन ने ऐसी वाटरप्रूफ हैंडमेड वर्कशीट्स बनाई। जिसे छात्र-छात्राएं बार-बार सालों साल उपयोग में ला सकते हैं। पियर लर्निंग हो या ग्रुप टीचिंग, परिषदीय विद्यालयों में किताबों की कमी हो या फिर शिक्षक की कमी, सबके लिए यह हैंडमेड बनाई गई वर्कशीट किताबों की बोझ को विद्यार्थियों के लिए कम करती हैं।
कक्षा एक के बच्चों के लिए बगलेस पद्धति को प्रोत्साहन करने वाली यह तकनीक, जिसके माध्यम से विद्यार्थी अपने कक्षा कक्ष में अपने सहपाठियों के साथ निरंतर सीख रहे हैं और अपने अधिगम को प्राप्त कर रहे हैं। इन वर्कशीट की खास बात यह है कि यह सभी निपुण लक्ष्य कि प्राप्ति को ध्यान में रखकर बनाई गई है। शून्य नवाचार की श्रेणी में शिक्षिका के इस नवाचार को जिला स्तर पर पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
वर्कशीट बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र है और इसे प्रेरित हो कई अन्य विद्यालयों में इस तकनीक को अपनाकर बच्चों के निपुण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
गांव मखमूलपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में क्यूआर कोड स्कैन करता छात्र। शिक्षिका।