प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि घायल रिक्शा चालक को प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट ने अटेंड किया था। उसके शरीर में कई चोट और फ्रैक्चर थे। मैंने खुद इस मामले की जांच की है। रिक्शा चालक की मृत्यु के बाद एक्सरे किए गए हैं। हालांकि चिकित्सकों और स्टाफ की मंशा गलत नहीं थी। वह यह जानना चाहते थे कि मृत्यु किस कारण से हुई है। सर्जरी और आर्थोपेडिक विभाग से जुड़े स्टाफ में मृत्यु के कारण को लेकर संदेह था। आर्थोपेडिक वाले कह रहे थे कि सीने में फ्रैक्चर की वजह से मृत्यु नहीं हो सकती, जबकि सर्जरी वाले कह रहे थे कि फ्रैक्चर की वजह से ही मृत्यु हुई है। उनकी गलती यह है कि उन्हें इसके लिए मुझसे अनुमति लेनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने बिना अनुमति के ये काम किया। इसी वजह से इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की जा रही है।
हो सकते हैं सस्पेंड
इस मामले में जिन जूनियर चिकित्सकों और स्टाफ की भूमिका सही नहीं पाई जाएगी, उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। प्राचार्य ने भी निलंबन की कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
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