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Meerut News: मां की आंखों में आंसू, दिल में सुकुन...चार साल बाद मिला न्याय

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आरोपियों ने दो लाख रुपये के लेनदेन में जघन्य घटना को दिया था अंजाम
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चार साल तक जिस मां सुरेश देवी ने अपने इकलौते बेटे भूपेंद्र और पोते अर्जुन को खोने का दर्द सीने में दबाए रखा, सोमवार को अदालत के फैसले के बाद उसकी आंखों में आंसू थे। ये आंसू चार साल बाद न्याय मिलने से छलके थे। छह अप्रैल 2022 को शामली में गांव मखमूलपुर में कंकरखेड़ा के सैनिक विहार कॉलोनी निवासी पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई थी। दोहरे हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने हत्यारे बर्खास्त सिपाही विक्रांत उसके चचेरे भाई अर्जुन, मोनू को उम्रकैद व उसके पिता वीरेंद्र को पांच साल की सजा सुनाई। पीड़िता सुरेश देवी ने कहा आज मैं बहुत खुश हूं। आज मेरे सब्र और न्याय की जीत हुई है।
कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के सरधना रोड स्थित सैनिक विहार कॉलोनी निवासी सुरेश देवी ने बताया कि मखमूलपुर गांव निवासी सिपाही विक्रांत का उनके बेटे भूपेंद्र से पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोपी सिपाही ने छह अप्रैल को उनके बेटे व पोते अर्जुन को अपने गांव बुलाया था। आरोपी ने उनके बेटे-पोते को बंधक बनाकर जमकर पीटा था। इसके बाद आरोपी ने अपने चचेरे भाई अर्जुन, पिता वीरेंद्र व दोस्त मोनू के साथ मिलकर दोनों की हत्या कर दी थी।
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पुलिस ने घटना के करीब एक सप्ताह के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बेटे और पोते की हत्या के बाद मां पूरी तरह टूट गई थी। परिवार का सहारा छिन गया था। इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं छोड़ी। वह लगातार आरोपियों को सजा दिलाने की मांग करती रही। अदालत में सुनवाई के दौरान भी वह हर तारीख पर न्याय की उम्मीद लगाए बैठी रही।
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-न्यायालय पर था विश्वास
सोमवार को जब अदालत का फैसला आया तो सुरेश देवी समेत घर के सभी सदस्यों की आंखें भर आई। सुरेश देवी ने कहा कि बेटे और पोते की हत्या का दर्द कभी खत्म नहीं हो सकता, लेकिन अदालत के फैसले से उसके जख्मों पर कुछ मरहम जरूर लगा है। मां ने कहा कि अदालत का फैसला उसके बेटे और पोते को वापस नहीं ला सकता, लेकिन दोषियों को सजा मिलने से यह भरोसा जरूर मजबूत हुआ है कि कानून से बड़ा कोई नहीं है। चार साल तक चले संघर्ष के बाद उसे लगा कि आखिरकार उसके आंसुओं और इंतजार को इंसाफ मिल गया।
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