- नगर निगम के खिलाफ लोगों का फूटा गुस्सा, छह अगस्त को हुआ था हादसा, उपचार के दौरान दम तोड़ा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। परतापुर गांव स्थित कान्हा उपवन गोशाला में छह अगस्त को करंट लगने से झुलसे बराल निवासी कर्मचारी अंकज की सोमवार तड़के उपचार के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद गुस्साए परिजन और ग्रामीण एंबुलेंस में शव लेकर गोशाला पहुंच गए। मुख्य द्वार पर शव रखकर परिजन धरने पर बैठ गए और निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। परिजनों ने निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की।
बताया गया कि छह अगस्त को अंकज गोशाला में जनरेटर बंद करते समय करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया था। अन्य कर्मचारियों ने उसे उपचार के लिए सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया था। अब तक उपचार चलने के बाद सोमवार तड़के उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया। मृतक के भाई विकास ने परतापुर थाने में गौशाला प्रभारी, वरिष्ठ प्रभारी, सुपरवाइजर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।
अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग
पोस्टमार्टम के बाद परिजन अन्य ग्रामीणों के साथ शव लेकर कान्हा उपवन पहुंचे और मुख्य गेट पर धरना शुरू कर दिया। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन परिजन अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका आरोप था कि नगर निगम की लापरवाही के कारण अंकज हादसे का शिकार हुआ। पंकज की मां सावित्री ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद अंकज को समय पर उपचार नहीं मिल सका। इससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई।
हंगामे की जानकारी मिलने पर सहायक नगर आयुक्त तनुजा निगम, अपर नगर मजिस्ट्रेट ब्रह्मपुरी राजू कुमार और सीओ ब्रह्मपुरी रामप्रकाश मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। परिजनों ने परिवार को आर्थिक सहायता, एक भाई को नगर निगम में नौकरी और मृतक की मां को पेंशन देने की मांग रखी। अंकज चार भाईयों में सबसे छोटा और अविवाहित था। सहायक नगर आयुक्त तनुजा निगम का कहना कि अंकज के परिजनों के साथ नगर निगम है। आर्थिक मदद भी कराएंगे।
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सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल
परिजनों और ग्रामीणों ने गौशाला में कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि बारिश के मौसम में गोशाला परिसर में पानी भर जाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों को बिजली से जुड़े काम करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और जूते तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कई महिला और पुरुष कर्मचारी चप्पल पहनकर ही काम करते हैं।आरोप है कि इतनी बड़ी गोशाला होने के बावजूद यहां स्थायी इलेक्ट्रिशियन तक तैनात नहीं है। बिजली से जुड़े काम, जो प्रशिक्षित इलेक्ट्रिशियन से कराए जाने चाहिए, कर्मचारियों से ही कराए जाते हैं। उनका कहना था कि यदि गौशाला में बिजली के काम के लिए जिम्मेदार कर्मचारी और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते तो अंकज को करंट लगने की घटना टाली जा सकती थी।