बसा टीकरी गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय से रिटायर्ड हुए खुशीराम ने कहा कि पहले संस्कार के साथ बच्चे पढ़ाई करने आते थे। शिक्षक और छात्रों में निकटता होती थी। अब का माहौल ऐसा नहीं है।
पहले तो जहां शिक्षक खड़े हो जाते थे, वहां पर छात्र कुर्सी लेकर चले आते थे। अब शिक्षक कहीं खड़े हो, कोई छात्र भटकता भी नहीं है। यदि हम सफाई को झाडू़ उठाते तो उससे पहले छात्र काम में लग जाते थे। अब तो माहौल बदला है। शिक्षक के साथ शिक्षा बदल गई है।
अमीनगर सराय निवासी इंटरमीडिएट कॉलेज से सेवानिवृत्त शिक्षक श्रीपाल वर्मा ने कहा कि गुरू और शिष्य में नाता मां और बाप का होता था। शिक्षक जिस प्रकार अपने बेटे को चाहते थे, वैसे ही कक्षा के सभी बच्चों से वैसा ही व्यवहार करते थे।
उनके पढ़ाई छात्र जो उच्च पदों पर है, आज भी उनके पैर छूते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहले की शिक्षा और अब की शिक्षा में क्या बदलाव हुआ है। अब तो शिक्षक के साथ-साथ छात्रों पर भी आधुनिकता हावी हो गई है।
केस-1
एक साल पहले पब्लिक स्कूल में एक शिक्षक ने बच्चे को डांट दिया। छात्र ने अभिभावकों से शिकायत की। इसके बाद मामला थाने पहुंच गया। यहां पर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ।
केस-2
बागपत जिले के स्कूल में मासूम से दुष्कर्म की वारदात हुई। शिक्षकों ने आगे बढ़कर प्रकरण में पुलिस की मदद लेने के बजाए मामले को दबाने का प्रयास किया। हालांकि इसके बाद दोनों को निलंबित किया।
बदल रहा दौर
जेवी डिग्री कॉलेज बड़ौत के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह कहते हैं कि दौर बदल रहा है। पढ़ने और पढ़ाने का तरीका बदल गया है। एक समय वह भी था, जब कक्षा में पढ़ाई के लिए बच्चे क्लास रूम के कोने में खड़ा होकर पढ़ने को तैयार हो जाते थे, लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते चलन और आधुनिकता की चकाचौंध में स्कूल तक छात्र-छात्राएं नहीं पहुंच रहे हैं। यह चिंता का कारण है। शिक्षकों और अभिभावकों को मिलकर समाधान करना होगा।