सालों से नौकरी कर रहे शिक्षकों ने जज्बे और अनुभव के दम पर पास की टीईटी
-शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से चिंतित थे
-मन में ठानकर की तैयारी और पा ली मंजिल
संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना। बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना जरूरी कर दिया गया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार बिना टीईटी किए नियुक्ति पाने वालों के लिए भी यह जरूरी कर दिया गया है। ऐसे में सालों से नौकरी कर रहे शिक्षकों को भी अपनी नौकरी खतरे में नजर आने लगी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और इसे चुनौती के रुप में लेकर तैयारी की। उम्र को भी आड़े नही आने दिया।
सुबह स्कूल में बच्चों को पढाया और रात को घर पर टीईटी की परीक्षा की तैयारी की। पढाने का अनुभव भी काम आया और जज्बे की जीत हुई। कई शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा पास की और दूसरों को भी संदेश दिया कि यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती।
मवाना कंपोजिट विद्यालय खेड़की जदीद में तैनात नौशाद अहमद, प्र.अ. कंपोजिट विद्यालय खालिदपुर नदीम अख्तर ने यह परीक्षा पास की। कंपोजिट विद्यालय गड़ीना के प्रधानाध्यापक अनवर अहमद भी परीक्षा में सफल हुए। इसके अलावा बज्मी (कंपोजिट विद्यालय धौलड़ी), नरेंद्र कुमार शर्मा (प्र.अ.), शिक्षिका बबीता और काशिफ जलील ने भी यह परीक्षा पास कर दूसरों को बताया कि हौसले बुलंद हो तो मंजिल दूर नहीं होती। शिक्षकों की इस अभूतपूर्व सफलता पर शिक्षक संघ के पदाधिकारियों, सहकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने हर्ष जताते हुए उन्हें बधाई दी है। अधिकांश शिक्षकों ने बताया कि लंबे समय तक पढ़ाने के बाद दोबारा किताबें उठाकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना एक बड़ी चुनौती थी,लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि परीक्षा पास करनी है। रोजी रोटी का भी सवाल था। इसलिए स्कूल में पढाई कराने के बाद घर पर खुद तैयारी करते थे। अनुभव भी काम आया और सफलता मिली।
समय के साथ खुद को अपडेट करना जरूरी
शिक्षकों का कहना है कि भले ही वह सालों से पढ़ा रहे हैं लेकिन इंसान को खुद को भी समय के साथ-साथ अपडेट करते रहना चाहिए। आधुनिक नई चीजों की जानकारी करनी चाहिए। उन्हें समझना चाहिए। सोशल मीडिया से भी मदद मिलती है। खुद को अपडेट रखना बहुत जरूरी है। नई तकनीकों की जानकारी होना भी जरूरी है। यह सब चीजें बच्चों को पढ़ाने में भी उपयोगी होती हैं।