मेरठ। नगर निगम का खेल भी गजब है। पहले सालाना करोड़ों की वित्तीय हानि बताकर डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली बीवीजी कंपनी को निलंबित किया, करीब दो महीने किरकिरी के बाद बहाल कर दिया और अब कंपनी को पांच करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। जिम्मेदार निगम के अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर वरिष्ठ अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। इस पर महानगर में अलग-अलग चर्चाएं भी शुरू हो गई।
महानगर के 73 वार्डों का कूड़ा उठाने का बीवीजी कंपनी और नगर निगम के बीच वर्ष 2022 में अनुबंध हुआ था। सात महीने पहले आईएएस सौरभ गंगवार ने मेरठ नगर निगम की कमान को संभाल लिया। नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने कूड़ा उठाने वाली कंपनी की जांच कराई। निगम की सालाना करोड़ों रुपये की वित्तीय हानि का आरोप लगाकर नगरायुक्त ने कंपनी को 7 जनवरी निलंबित कर दी। कंपनी के कार्याें का मूल्यांकन करने वाली गठित जांच समिति ने भी नगर आयुक्त द्वारा लगाए आरोप पर सहमति जता दी है। राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कमिश्नर और नगर आयुक्त को पत्र लिखा।
जिसमें कंपनी के कार्यों की मॉनीटरिंग करने वाले वरिष्ठ प्रभारी स्वास्थ्य विभाग अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार और प्रभारी नगर स्वास्थ्य डॉ. हरपाल सिंह की जांच कराने की बात कही। दो महीने बाद पांच मार्च को नगर आयुक्त ने कंपनी को सशर्त बहाल कर दिया। 31 मार्च 2025 से पहले ही नगर निगम ने बीवीजी कंपनी को पांच करोड़ का भुगतान करने की फाइल तैयार कर दी। अधिकारियों ने स्वीकृति देकर भुगतान कर दिया है। इस प्रकरण में निगम की खूब किरकिरी हुई। मामला कमिश्नर के संज्ञान में था, बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की जांच करना भी नगर निगम ने मुनासिब नहीं समझा।
90 दिन का समय, व्यवस्था नहीं सुधरीं
नगर निगम ने 90 दिन का समय देकर बीवीजी कंपनी को बहाल किया है। दस बिंदु की शर्तें लिखित में दी। बहाली को भी एक महीने होने को है, निगम न इन बिंदु पर मॉनिटरिंग कर रहा है और न ही कंपनी के कार्य में सुधार है। जिसको लेकर पार्षदों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सफाई व्यवस्था में कोई भी सुधार नहीं हुआ। नगर निगम की लापरवाही के चलते महानगर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लग रहे हैं।
राज्यसभा सदस्य की चिट्ठी पर खामोश अधिकारी क्यों
राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की चिट्ठी में नगर निगम के दो अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। निलंबन के दौरान चर्चा यह भी थी कि अनुबंध की शर्तों पर काम न करने वाली कंपनी के कुछ लोग पैसा लेते थे। कमिश्नर ने भी निगम अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। कंपनी के कार्यों के मूल्यांकन से लेकर भुगतान की जांच की गई, लेकिन अभी तक निगम के दोनों अधिकारियों के प्रति कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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सशर्त बीवीजी कंपनी की बहाली करते हुए 90 दिन का समय दिया गया है। कंपनी द्वारा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने की मॉनिटरिंग के लिए निगम अधिकारियों को लगाया है। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पुराना भुगतान किया गया है।
सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त