म्यांमार (बर्मा) के शरणार्थी जुनैद की गिरफ्तारी के बाद खुफिया एजेंसियों के अधिकारी सतर्क हो गए हैं। उन्होंने अब गुपचुप तरीके से जांच शुरू कर दी है। आशंका जताई जा रही है कि देवबंद में कुछ अन्य स्थानों पर संदिग्ध छिपे हो सकते हैं।
पिछले दिनों बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के बाद देवबंद में फर्जी पासपोर्ट के गोरखधंधे का खुलासा हुआ तो हड़कंप मच गया था। जिसके बाद एटीएस, एसटीएफ समेत कई जांच एजेंसियों ने संयुक्त छापेमारी कर नगर क्षेत्र से कई लोगों को गिरफ्तार किया था। लेकिन कई लोग अभी भी एजेंसियों की नजरों से बचे हुए हैं जो बहुत पुराने समय से पासपोर्ट बनवाने का काम कर रहे हैं। पुलिस को आशंका है कि इनमें कुछ लोग स्थानीय भी हैं। इनकी मदद के बिना नगर में कोई भी एजेंट पासपोर्ट नहीं बनवा सकता। शनिवार को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के प्रयास में लगा म्यांमार का जुनैद आखिर किसके संपर्क में था और पासपोर्ट बनवाने में कौन-कौन उसकी मदद कर रहे थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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पुलिस एवं खुफिया विभाग को आशंका है कि नगर क्षेत्र में और भी संदिग्ध छिपे हो सकते हैं। खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी इस तरफ इशारा तो कर रहे हैं, लेकिन पुख्ता जानकारी न होने के चलते कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं।
फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का देवबंद में लगातार खुलासा हो रहा है। दस माह में सात संदिग्ध लोग पकड़े जा चुके हैं। जिनमें पांच लोग बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन से जुड़े हुए थे। देवबंद में रहने वालों पर खुफिया विभाग एवं एटीएस की नजर लगी हुई है।
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