डीएम ने पीओ डूडा को जांच के आदेश दिए, तो डूडा के परियोजना अधिकारी ने निसार अहमद को अपात्र बता दिया। उसे अगली किश्त देने से मना कर दिया। साथ ही कहा कि उससे रिकवरी होगी, जबकि उसे पात्र बनाकर पहले ही पत्र दिया जा चुका था और किश्त भी जारी की जा चुकी थी। इसलिए उन्होंने पात्रों के चयन में गड़बड़ी की आशंका जताई और पात्रों की जांच कराए जाने की मांग की थी, लेकिन जांच के नाम पर कुछ प्राइवेट कर्मचारियों पर कार्रवाई कर पूरे मामले की लीपापोती कर दी गई। जिलाधिकारी द्वारा कार्रवाई की रिपोर्ट शासन एवं केंद्र को भेज दी गई।
फरहा फैज ने कहा कि सिर्फ प्राइवेट कंपनी का कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अन्य प्राइवेट कर्मचारी 15 करोड़ रुपये का गोलमाल नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने सीबीआई को जांच के लिए पत्र भेजा, हाईकोर्ट में भी डीएम की बजाय आलोक कुमार पांडेय को पार्टी बनाकर जांच की अपील दाखिल की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आवाज को दबाने के लिए निसार अहमद को मोहरा बनाकर रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशहरे के दिन विजय वर्मा की शिकायत लेकर तहसील के कुछ अधिकारी उनके घर पहुंचे थे, लेकिन जांच में उनकी शिकायत झूठी पाई गई तो निसार अहमद को मोहरा बनाकर एफआईआर कराई गई। इस योजना में 15 करोड़ का गबन हुआ है। इसकी जांच कराने पर उनके खिलाफ अभी और भी रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। सिर्फ एक मामला नहीं है, पहले उनके मकान मालिक से प्रार्थनापत्र दिलवाया गया था। 55 बीघा के सुनारों के एक बाग का भी मामला है, बच्चों के श्मशान की भूमि का भी मुद्दा उन्होंने उठाया है, जिस पर शिवधाम बनाया जा रहा है।
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