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आत्महत्या रोकथाम दिवस: कोरोना काल में दांपत्य जीवन में और अधिक बढ़ गई खटास, जान गंवा रहे पति-पत्नी 

Thu, 10 Sep 2020 12:24 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

- साल 2020 में अब तक 35 जबकि 2019 में आए थे 26 मामले
- कोरोना काल यानि मार्च से लेकर अब तक 28 मामले आए सामने 
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suicide - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोरोना काल में तनाव बढ़ रहा है। युवाओं को रोजगार की चिंता है। भविष्य की उधेड़बुन में दांपत्य जीवन बिखर रहा है। बच्चे पढ़ाई को लेकर तनाव में आ गए हैं। ऑनलाइन शिक्षा के दौरान छींटाकशी, अश्लील हरकतें, गाली-गलौज से बेटियों को तनाव ने घेरना शुरू कर दिया है।

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बुजुर्ग भी चिंता में घिर गए हैं। ऐसे में आत्महत्या के मामलों का ग्राफ बढ़ गया है। हर मामले की तह में तनाव है। पहले पत्नी की हत्या और फिर खुद की जान देने के कई मामले सामने आ चुके हैं। आत्महत्या के अधिकतर मामले पुलिस तक पहुंचने से पहले ही अंतिम संस्कार पर खत्म किए जाते रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पुलिसकर्मी खुद तनाव में घिर गए हैं। 

इस तरह बढ़ा आत्महत्या का ग्राफ
बागपत। साल 2019 में आत्महत्या के करीब 26 मामले सामने आए थे। मगर, साल 2020 में अब तक करीब 35 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें कोरोना से घिरे मार्च से अब तक 28 मामले शामिल है। अधिकतर मामलों में परिजन पुलिस कार्रवाई से बचते हैं।

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केस-एक: एक सितंबर को कलक्ट्रेट के निकट आवास में बागपत तहसील के लेखपाल अंशुल ने फांसी पर लटककर आत्महत्या कर ली। अब तक की पुलिस जांच में सामने आया है कि पत्नी से विवाद और अन्य वजहों से आत्महत्या कर ली।

केस-दो: एक सितंबर को सोनीपत निवासी युवक ने खेकड़ा क्षेत्र के सुन्हैड़ा गांव स्थित अपनी ससुराल में जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली। गृहक्लेश आत्महत्या की वजह बताई गई। 

केस-तीन: बागपत के राष्ट्रवंदना चौक स्थित प्लाईवुड की दुकान में काम करने वाले युवक विशाल (23) ने आरी से खुद की गर्दन काटकर आत्महत्या कर ली थी। युवक घरेलू वजह से तनाव में बताया गया था।

केस-चार: दत्तनगर गांव की महिला सिपाही औरया जिले में तैनात थी। कोरोना काल में शादी की, लेकिन पति से खटपट हो गई। महिला सिपाही ने औरया में ही आत्महत्या कर ली थी। पति शिक्षक था और यह मामला महीने भर तक चर्चा में रहा।
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केस-पांच: बिजवाड़ा का युवक देहरादून में रोडी डस्ट की बिक्री का कार्य करता था। जनवरी महीने में तनाव के कारण वह बड़ौत पहुंचा। होटल में कमरा किराए पर लिया। कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। होटल मालिक ने मुकदमा दर्ज कराया था।

तनाव में सिपाही, पत्नियों की ले रहे जान
पुलिसकर्मी तनाव में है। जिले में दो मामले ऐसे आए हैं, जिनमें सिपाही पति ने पहले पत्नी की हत्या की और बाद में आत्महत्या कर ली।  सहारनपुर में तैनात रंछाड गांव निवासी सोनू (35) यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात था।

कोरोना काल में ड्यूटी पर नहीं गया। पत्नी से विवाद हुआ। सिपाही ने पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी और खुद भी कमरे में फांसी के फंदे पर झूल गया था। मार्च 2019 में पुलिस लाइन में सिपाही ने पत्नी की हत्या कर खुद भी जान दे दी थी।

परिवार और नजदीकी पहचान सकते हैं तनाव 
मनोचिकित्सक डॉ. अजय कुमार का कहना है कि तनाव की पहचान कर आत्महत्या के मामले रोके जा सकते हैं। चिड़चिड़ापन, अनिंद्रा, आत्मविश्वासन की कमी, भूख कम लगना और एक ही बात को बार-बार दोहराने जैसे लक्षण तनाव की पहचान हैं। परिवार और नजदीकी लोग तनाव पहचान सकते हैं। ऐसे व्यक्ति की समय पर पहचान और काउंसिलिंग जरूरी होती है।
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