सुसाइड नोट नहीं
एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर ने मरने से पहले बोर्ड पर उक्त सब बातें तो लिख दीं, लेकिन सवाल यह है कि किसी से शिकायत थी तो कोई सुसाइड नोट क्यों नहीं लिखा गया।
यौन उत्पीड़न में निलंबित किए गए थे
विभाग की कुछ छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद यह मामला आतंरिक जांच समिति को सौंपा गया था। इस पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया गया था। यह घटना काफी दुखद है। - प्रो. प्रकाश अंताल, डीन वेलफेयर स्टूडेंट्स जम्मू विवि
'100 से ज्यादा शोध पत्र छप चुके'
एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर के साथ पढ़ाने वाले कुछ शिक्षकों का कहना है कि वह बहुत ही इंटेलिजेंट थे। उनके 100 से ज्यादा शोध पत्र छप चुके हैं। वह सेना और पुलिस में जाकर लेक्चर देते रहे हैं। मेरठ कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. अनिता मोरल बताती हैं कि प्रो. चंद्रशेखर उनके बैचमेट थे। नवंबर 2019 में वे मेरठ कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर वक्ता आए थे। उनकी पत्नी डॉ. नीता ने भी सीसीएसयू से ही साइकोलॉजी में पीएचडी की थी। डॉ. अनिता मोरल बताती हैं कि जबसे ये खबर मिली है, सभी बैचमेट सदमे में हैं। विश्वविद्यालय में प्रो. चंद्रशेखर के सीनियर रहे डॉ. रवि प्रकाश बताते हैं कि चंद्रशेखर होनहार और बेहद मिलनसार थे।